
कार्णिक के मुताबिक, इसकी वजह यह है कि शिक्षा व्यवस्था को आज के जमाने की जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड नहीं किया गया है। कार्णिक आईटी कंपनियों के शीर्ष संगठन नास्कॉम के प्रमुख भी रह चुके हैं।
आईसीटी एकेडमी व नास्कॉम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सेमिनार आईसीटेक्ट ब्रिज-2012 को संबोधित करते हुए कार्णिक ने कहा कि इंजीनियरिंग स्नातकों को नौकरी लायक बनाने के लिए आईटी इंडस्ट्री व कॉलेजों को एक साथ मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि आज भी इंजीनयिरिंग स्नातकों को नौकरी के समय प्रोग्रामिंग व कम्युनिकेशन स्किल जैसी चीजों को सीखना पड़ता है, जो कि शिक्षा में इतना पैसा व समय लगाने के बाद काफी अजीब बात है। इसकी एक ही वजह नजर आती है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था पिछले दशकों में ज्यादा सफल नहीं रही है।
खास तौर पर आईटी उद्योग को भी इस मामले में निशाने पर लेते हुए कार्णिक ने कहा कि उद्योग के लोग कईं बार शिकायत करते हैं कि उन्हें नौकरी करने लायक स्नातक नहीं मिल पा रहे हैं। लेकिन, क्या कभी उद्योग ने यह बताने की कोशिश की है कि छात्रों को शिक्षा के समय किस तरह की अतिरिक्त जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए? मेरे ख्याल से उद्योग ने यह काम नहीं किया है और यही हम जानना चाहते हैं।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा से ज्यादा बीपीओ स्थापित करने की जरूरत पर बल देते हुए कार्णिक ने कहा कि गांवों में काफी संख्या में टेलेंट वाले लोग उपलब्ध हैं और वहां किसी आईटी कंपनी के लिए काफी अच्छे अवसर उपलब्ध हैं।
एक अध्ययन का हवाला देते हुए कार्णिक ने बताया कि भारत का आईटी उद्योग वर्ष 2020 तक 16.3 फीसदी की रफ्तार से बढ़ते हुए 225 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। मौजूदा समय में यह 69 अरब डॉलर के स्तर पर है।
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