केजरीवाल और अन्ना सदमे में नहीं हैं, दरअसल इन्होंने लोगों को इतने सब्जबाग दिखा डाले कि अपेक्षा से उतपन्न क्रोध के भाजक बनेंगे। रहा प्रश्न एक किसी कवि का तो वे तो बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं, हमने देखा जब वे रायपुर आए। तो मीडिया, आम लोग, नेता, जनता न जाने क्या मान रही थी। था कुछ नहीं उन्होंने अपने कविताइ कंटेंट में अन्ना का तडक़ा लगाकर अपने प्रफेशन को और न्यायसंगत बनाने की कोशिश की थी। मंच जिसपर तीन महीने पहले आते थे 50 हजार में अब वहां वे जाते हैं 1 लाख से भी ज्यादा में, एक बिजनेस मैनेजर भी रख लिया है। आने जाने का सब ठाठ है। अगर इतने ही देशभक्त हैं तो कविता के मंच को पहले की तरह ही निशुल्क या न्यूनतम शुल्क के साथ इस दिशा में जन जागरण के लिए क्यों नहीं करते। इकलौता ईमानदार मूर्ख आदमी है अन्ना बाकी सब उनपर सवार अपनी नैया पार लगा रहे हैं।
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