ये जरुरी नही की आप की सोच दुनिया की सोच से मिले .........यह भी तो संभव हो सकता हैकी ....आप जो सोचें पूरी दुनिया वो सोचने लगे .....बस जरुरत है अपनी सोच को उस स्तर तक ले जाने के ....जहा पर की ख़ुद आप को लगनेलगे की हाँ अब आपकी सोच वो रूप ले चुकी है ...जो की पूरी दुनिया की सोच को प्रभावित कर सकतीहै........अतः सोचने की शक्ति का विकास हर इन्सान की नितांत आवश्यकता है...... |
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