हम वो हैं जो अपनी रातों का क़त्ल करके, औरों के ख़्वाबों की हिफाज़त में रहते हैं ! ... हैरान है कई रोज़ से ठहरा हुआ पानी तालाब में अब क्यूँ कोई कंकर नहीं गिरता यूं तो होते है दरिया मैं कतरे सब ! कतरा वही जिसमे समन्दर दिखाई दे!! ''उठा जो तूफान वो काफी था मेरी ज़िन्दगी हिलाने को वक़्त ने पहचान दी हर लह्म आंसू बहाने को... '' |
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