Total Pageviews

Saturday, September 17, 2011

हम वो हैं जो


हम वो हैं जो अपनी रातों का क़त्ल करके,

औरों के ख़्वाबों की हिफाज़त में रहते हैं !


... हैरान है कई रोज़ से ठहरा हुआ पानी

तालाब में अब क्यूँ कोई कंकर नहीं गिरता


यूं तो होते है दरिया मैं कतरे सब !

कतरा वही जिसमे समन्दर दिखाई दे!!

''उठा जो तूफान वो काफी था मेरी ज़िन्दगी हिलाने को

वक़्त ने पहचान दी हर लह्म आंसू बहाने को... ''
....................

No comments:

Post a Comment

http://rktikariha.blogspot.com/