एक कवि का जवाब:
अपनी आँखों पर शर्म आने लगी है,
यह तस्वीर रुलाने लगी है,
कोई इंसान हो तो मुझे बताये
की इंसानियत रूठ के कहा जाने लगी है
जिन्हें खुद जन्म दिया दाता ने
वो पीढ़ी उनपर ही कहर ढाने लगी है
गलती करके माफ़ी तो दूर है दोस्तों,
उल्टा हमें ही तर्क बताने लगी है,
पिता जी सभ्यता बाप में बदली,
और माँ बोलने में भी शर्म आने लगी है
दूध अब उन्हें जहर लगता है क्या कहू
मदिरा असर अब दिखाने लगी है,
कोई इंसान हो तो मुझे बताये
की इंसानियत रूठ के कहा जाने लगी है
कोई इंसान हो तो मुझे बताये
की इंसानियत रूठ के कहा जाने लगी है
जिन्हें खुद जन्म दिया दाता ने
वो पीढ़ी उनपर ही कहर ढाने लगी है
गलती करके माफ़ी तो दूर है दोस्तों,
उल्टा हमें ही तर्क बताने लगी है,
पिता जी सभ्यता बाप में बदली,
और माँ बोलने में भी शर्म आने लगी है
दूध अब उन्हें जहर लगता है क्या कहू
मदिरा असर अब दिखाने लगी है,
कोई इंसान हो तो मुझे बताये
की इंसानियत रूठ के कहा जाने लगी है
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