आज बदला हमारा कल बदला !
नेताऒं नॆं हमें पल-पल बदला !!१!
...
गिरगिट ने रंग क्या बदला होगा,
नेताओं ने है जितना दल बदला !!२!!
देकर वायदे बदल जाते हैं ऎसे,
जैसे मंदिर मे कोई चप्पल बदला !!३!!
संसद को देखने से पता चलता है,
सफ़ेद कपड़ो मे पूरा चंबल बदला !!४!!
जाति धर्म भाषा बदल जाते मगर
न बल बदला इनका न छल बदला !!५!!
वॊट लेने के बाद बदल जाते हैं"राज",
अफ़सॊस एक भी न मुकम्मल बदला !!
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भ्रष्टाचार के विरुद्ध
अब कभी ज़ंग नहीं हो सकती,
अलबत्ता हिस्सा बांटने पर
हो सकता है झगड़ा
मगर मुफ्त में मिले पैसे को
हक की तरह वसूल करने में
किसी की नीयत तंग नहीं हो सकती।
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मर गयी है लोगों की चेतना इस कदर कि
सपने देखने के लिये भी
सोच उधार लेते हैं,
अपनी मंज़िल क्या पायेंगे वह लोग
जो हमराह के रूप में कच्चे यार लेते हैं,
अपने ख्वाबों में चाहे कितने भी देखे सपने
आकाश में उड़ने के
पर इंसान को पंख नहीं मिले
फिर भी कुछ लोग उड़ने के अरमान पाल लेते हैं।
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लोगों में चेतना लाने का काम
भी अब ठेके पर होने लगा है,
जिसने लिया वह सोने लगा है,
मर गये लोगों के जज़्बात
मुर्दा दिलों में हवस के कीड़ों का निवास होने लगा है।
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