Total Pageviews

Monday, November 26, 2012

सदगुरु की अमृत वाणी


"यह जरुरी नहीं कि जो आप चाहते हैं संसार में वही मिल जाए।
यह भी जरुरी नहीं कि आपको संसार में आपके मनोनुकूल ही परिस्थितियां मिलें ।
यह भी संभव नहीं कि आपको एक सम्पूर्ण संसार या एक ऐसा परिवार मिले जिसमें सारी खुशियां हों ।
हर एक के लिए कुच्छ न कुच्छ तो कमी रहेंगी ही।
इस अभाव के ससार में भी जो शांत रह सके, मुस्करा सके तो समझो उसे जीने की कला आ गई।

No comments:

Post a Comment

http://rktikariha.blogspot.com/