बाईलाइन / दुकानदारी खत्म होने का समय
मनमोहन सिंह का राजनीतिक जीवन नरसिंह राव द्वारा 1991 में आर्थिक संकट का समाधान खोजने के लिए वित्त मंत्री के तौर पर नियुक्ति से शुरू हुआ. वे सफल हुए, क्योंकि वे समस्या का हिस्सा नहीं थे. 2012 में उनके पास यह मौका नहीं है. उन्हें यह कौन बताये कि जब दीवाली छूट के दौरान आपकी दुकान खाली हो, तब आपको यह अवश्य समझ लेना चाहिए कि दुकानदारी के आपके दिन खत्म हो गये हैं. एम जे अकबर का विश्लेषण.
Read More
बहस / इंदिरा तत्व के बरक्स राजनीति
एक तरफ इंदिरा थीं, जिन्होंने गुलाम भारत में पढ़ाई-लिखाई की, लेकिन उन्होंने अपने स्व को ज्यादा अहमियत दी. दूसरी तरफ प्रियंका हैं, जो आजाद भारत के सबसे ताकतवर परिवार में पैदा हुईं, पली-बढ़ीं, जिन्हें राजनीति में शीर्ष हैसियत थाली में परोस कर मिल रहा है, वह हाउस वाइफ रहना पसंद कर रही है. उन्होंने कई बार कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता पति और बच्चे हैं. मृणाल वल्लरी का विश्लेषण.
Read More
संवाद / राजनीति, होटल और कहानियां
अरुण प्रकाश 4 वर्षों से ज्यादा समय से फेफड़े की बीमारी एम्फीसीमिया से ग्रस्त होकर कृत्रिम ऑक्सीजन के सहारे जीवित थे. उनका घर ही अस्पताल हो गया था. पत्नी वीणा प्रकाश अस्पताल की परिचारिका, नर्स की भूमिका में ऑक्सीजन की नली से उन्हें हर वक्त जुड़े रखने और उनकी पल-पल बढ़ती परेशानियों में उनकी निकट सहयोगी थीं. मुझे हर बार ऐसा लगता था कि उनके पास कुछ ऐसी बातें कहने के लिए हैं, जो उनने अब तक किसी से नहीं कही हो और अब वे मुझे बतायेंगे. कथाकार अरुण प्रकाश से पुष्पराज की बातचीत.
Read More
बाईलाइन/ सह अस्तित्व पर हमला
पैगम्बर मुहम्मद साहब पर भद्दी फिल्म को निर्माता ने नहीं, बल्कि धर्मांध ने बनाया है, जो इसके खिलाफ हिंसक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने के प्रति दृढ़ है. यह दुखद है कि इस हिंसक प्रतिक्रिया से कई निर्दोष या बच्चों के दिमाग में इसलाम की छवि शांति के बजाय हिंसा के स्रोत के तौर पर पक्की हो जायेगी. लीबिया में अमरीकी राजनयिक के क्रूर हत्यारे इसके आभारी होंगे. एम जे अकबर का विश्लेषण.
Read More
नर्मदा जल सत्याग्रह/ न्याय का आग्रह
17 दिनों तक पानी में डूब कर जल सत्याग्रह करने वाले लोग कुल मिलाकर 487 ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय में दे चुके हैं; 8 बार भोपाल में उनसे या उनके प्रतिनिधियों से मिले हैं; 170 दिन का अनशन कर चुके हैं; जिला स्तर और जल विद्युत परियोजना कंपनी को दिए गए आवेदनों की गिनती अभी भी जारी है; इतना सब के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं-बाँध भरेगा. सचिन कुमार जैन का विश्लेषण.
Read More
बहस / युद्ध कौन चाहता है?
युद्ध के घुमड़ते संकट पर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी इजरायली संसद में विपक्ष के नेता शाउन मोफाज ने की. उन्होंने नेतन्याहू से पूछा- प्रधानमंत्री जी, आपकी नजरों में सबसे बड़ा शत्रु कौन है? संयुक्त राज्य अमरीका या ईरान? आपको सबसे ज्यादा डर किससे लगता है? अहमदीनेजाद से या ओबामा से? आप कहां के निजाम को बदलते हुए देखना चाहते हैं, अमरीका के या ईरान के? एम जे अकबर के विचार.
Read More
बहस / नये प्रयोग की प्रतीक्षा
भारत में आजादी के बाद दो बार लोगों ने जाति या अन्य किसी संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही एकदम नए दलों को सत्ता में पहुंचाया है. यह बात दूसरी है कि सत्ता पाने के बाद ये प्रयोग बिखर गए. मैगसेसे से सम्मानित संदीप पांडेय के विचार.
Read More
बहस / पानी का पूंजीवाद
बहती नदियों के दोनों किनारों पर उद्योगों के कालेधन को सफेद बनाने के नाम पर फार्म हाउस बन गए हैं. फार्म हाउस में सुन्दरियों के तन, नेता के मन और उद्योगपतियों के धन की आर्द्रता है. संविधान विशेषज्ञ कनक तिवारी के विचार.
Read More
मनमोहन सिंह का राजनीतिक जीवन नरसिंह राव द्वारा 1991 में आर्थिक संकट का समाधान खोजने के लिए वित्त मंत्री के तौर पर नियुक्ति से शुरू हुआ. वे सफल हुए, क्योंकि वे समस्या का हिस्सा नहीं थे. 2012 में उनके पास यह मौका नहीं है. उन्हें यह कौन बताये कि जब दीवाली छूट के दौरान आपकी दुकान खाली हो, तब आपको यह अवश्य समझ लेना चाहिए कि दुकानदारी के आपके दिन खत्म हो गये हैं. एम जे अकबर का विश्लेषण.
Read More
बहस / इंदिरा तत्व के बरक्स राजनीति
एक तरफ इंदिरा थीं, जिन्होंने गुलाम भारत में पढ़ाई-लिखाई की, लेकिन उन्होंने अपने स्व को ज्यादा अहमियत दी. दूसरी तरफ प्रियंका हैं, जो आजाद भारत के सबसे ताकतवर परिवार में पैदा हुईं, पली-बढ़ीं, जिन्हें राजनीति में शीर्ष हैसियत थाली में परोस कर मिल रहा है, वह हाउस वाइफ रहना पसंद कर रही है. उन्होंने कई बार कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता पति और बच्चे हैं. मृणाल वल्लरी का विश्लेषण.
Read More
संवाद / राजनीति, होटल और कहानियां
अरुण प्रकाश 4 वर्षों से ज्यादा समय से फेफड़े की बीमारी एम्फीसीमिया से ग्रस्त होकर कृत्रिम ऑक्सीजन के सहारे जीवित थे. उनका घर ही अस्पताल हो गया था. पत्नी वीणा प्रकाश अस्पताल की परिचारिका, नर्स की भूमिका में ऑक्सीजन की नली से उन्हें हर वक्त जुड़े रखने और उनकी पल-पल बढ़ती परेशानियों में उनकी निकट सहयोगी थीं. मुझे हर बार ऐसा लगता था कि उनके पास कुछ ऐसी बातें कहने के लिए हैं, जो उनने अब तक किसी से नहीं कही हो और अब वे मुझे बतायेंगे. कथाकार अरुण प्रकाश से पुष्पराज की बातचीत.
Read More
बाईलाइन/ सह अस्तित्व पर हमला
पैगम्बर मुहम्मद साहब पर भद्दी फिल्म को निर्माता ने नहीं, बल्कि धर्मांध ने बनाया है, जो इसके खिलाफ हिंसक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने के प्रति दृढ़ है. यह दुखद है कि इस हिंसक प्रतिक्रिया से कई निर्दोष या बच्चों के दिमाग में इसलाम की छवि शांति के बजाय हिंसा के स्रोत के तौर पर पक्की हो जायेगी. लीबिया में अमरीकी राजनयिक के क्रूर हत्यारे इसके आभारी होंगे. एम जे अकबर का विश्लेषण.
Read More
नर्मदा जल सत्याग्रह/ न्याय का आग्रह
17 दिनों तक पानी में डूब कर जल सत्याग्रह करने वाले लोग कुल मिलाकर 487 ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय में दे चुके हैं; 8 बार भोपाल में उनसे या उनके प्रतिनिधियों से मिले हैं; 170 दिन का अनशन कर चुके हैं; जिला स्तर और जल विद्युत परियोजना कंपनी को दिए गए आवेदनों की गिनती अभी भी जारी है; इतना सब के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं-बाँध भरेगा. सचिन कुमार जैन का विश्लेषण.
Read More
बहस / युद्ध कौन चाहता है?
युद्ध के घुमड़ते संकट पर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी इजरायली संसद में विपक्ष के नेता शाउन मोफाज ने की. उन्होंने नेतन्याहू से पूछा- प्रधानमंत्री जी, आपकी नजरों में सबसे बड़ा शत्रु कौन है? संयुक्त राज्य अमरीका या ईरान? आपको सबसे ज्यादा डर किससे लगता है? अहमदीनेजाद से या ओबामा से? आप कहां के निजाम को बदलते हुए देखना चाहते हैं, अमरीका के या ईरान के? एम जे अकबर के विचार.
Read More
बहस / नये प्रयोग की प्रतीक्षा
भारत में आजादी के बाद दो बार लोगों ने जाति या अन्य किसी संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही एकदम नए दलों को सत्ता में पहुंचाया है. यह बात दूसरी है कि सत्ता पाने के बाद ये प्रयोग बिखर गए. मैगसेसे से सम्मानित संदीप पांडेय के विचार.
Read More
बहस / पानी का पूंजीवाद
बहती नदियों के दोनों किनारों पर उद्योगों के कालेधन को सफेद बनाने के नाम पर फार्म हाउस बन गए हैं. फार्म हाउस में सुन्दरियों के तन, नेता के मन और उद्योगपतियों के धन की आर्द्रता है. संविधान विशेषज्ञ कनक तिवारी के विचार.
Read More
No comments:
Post a Comment
http://rktikariha.blogspot.com/