‘11
सितंबर 1893 को शिकागो में स्वामी विवेकानंद के दिए गए भाषण की तारीफ
सुभाष चंद्र बोस ने भी की थी। स्वामी विवेकानंद ने वहां जब पांच शब्द
‘सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका’ कहे तो तालियों से पूरा हॉल गूंज उठा
था। बोस ने कहा था कि स्वामीजी का भाषण केवल 470 शब्दों का था। मगर उन पांच
शब्दों में जादू इसलिए था क्योंकि जब कोई बात दिल से निकलती है तो वह दिल
तक पहुंचती है।’
नागपुर के विवेकानंद केंद्र से आए मुकुंद कानिटकर ने मंगलवार को विश्व शिकागो दिवस पर हुए व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद से जुड़ी बातों को साझा किया। यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में हुए इस प्रोग्राम में श्री कानिटकर ने कहा कि शिकागो में विश्व धर्म सभा में सभी संप्रदाय के प्रतिनिधियों को बुलाया था। उन सब में सबसे युवा स्वामी विवेकानंद थे। स्वामीजी से पहले चार वक्ताओं ने ‘ब्रदर्स एंड सिस्टर्स’ शब्द का इस्तेमाल किया था। बस फर्क इतना था कि स्वामी जी ने पहले सिस्टर्स कहा था। स्वामीजी ने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि वे मानते थे कि आने वाली शताब्दी मातृशक्ति की होगी।
श्री कानिटकर ने कहा स्वामी विवेकानंद ने प्रेरणा स्वरूप तीन बातें बताई थीं। पहली सर्व समावेश की, दूसरी विविधता का सम्मान करने की और तीसरी सेवा करने की। सेवा करने से पाने वाला नहीं, बल्कि करने वाला धन्य होता है।
नागपुर के विवेकानंद केंद्र से आए मुकुंद कानिटकर ने मंगलवार को विश्व शिकागो दिवस पर हुए व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद से जुड़ी बातों को साझा किया। यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में हुए इस प्रोग्राम में श्री कानिटकर ने कहा कि शिकागो में विश्व धर्म सभा में सभी संप्रदाय के प्रतिनिधियों को बुलाया था। उन सब में सबसे युवा स्वामी विवेकानंद थे। स्वामीजी से पहले चार वक्ताओं ने ‘ब्रदर्स एंड सिस्टर्स’ शब्द का इस्तेमाल किया था। बस फर्क इतना था कि स्वामी जी ने पहले सिस्टर्स कहा था। स्वामीजी ने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि वे मानते थे कि आने वाली शताब्दी मातृशक्ति की होगी।
श्री कानिटकर ने कहा स्वामी विवेकानंद ने प्रेरणा स्वरूप तीन बातें बताई थीं। पहली सर्व समावेश की, दूसरी विविधता का सम्मान करने की और तीसरी सेवा करने की। सेवा करने से पाने वाला नहीं, बल्कि करने वाला धन्य होता है।
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