रायपुर। ऑफ सीजन में धान संग्रहण केंद्रों मेंरखरखाव के नाम पर करोड़ों रूपए निकाल लिए गए । बारिश के वक्त केंद्रों में कामकाज ठप रहने के बावजूद इनमें जमकर खर्चा दर्शाया गया है। अब आला अफसरों को इस संबंध में जबाव देते नहीं बन रहा। वे बचाव में इतना ही कहते हैं कि पूरे मामले की छानबीन कराएंगे।
रायपुर जिले में सबसे ज्यादा पौने दो करोड़ रूपए निकाले गए। इसी तरह महासमुंद और बिलासपुर समेत अन्य जिलों में भी जमकर वारा न्यारा हुआ। मार्कफेड दस्तावेजों के मुताबिक धान संग्रहण केंद्रों के प्रभारियों ने पिछले साल एक जून से 15 अक्टूबर के बीच व्यावसायिक कार्य के लिए मोटी रकम निकली। एक-एक दिन में तीन-तीन लाख रूपए फूंक दिए।
कई केंद्रों में चार महीने के भीतर 62 लाख रूपए तक अग्रिम आहरण किया गया। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बारिश में खुले आसमान के नीचे संग्रहण केंद्रों में चौतरफ सन्नाटा रहता है। इनमें धान की आवक न उठाव होता। खेती के काम में व्यवस्त होने के कारण मजदूर भी नहीं मिलते। जानकारों के मुताबिक ऎसे में केवल सुरक्षा में चौकीदारों के अलावा फेंसिंग जैसे छोटे-मोटे काम ही कराए जा सकते हैं तो फिर इतने मोटे अमाउंट का आखिर क्या किया गया?
प्रभारियों के नाम जारी
रायपुर के ज्यादातर धान संग्रहण केंद्रों को प्रभारियों के नाम राशि जारी की गई है। इनमें अतेंद्र सिंह को 2067374 रूपए। इसी तरह जगदीश श्रीवास को 353239, देवी प्रसाद साहू को 1661145, गजेंद्र साहू को 4481544, होल्कर प्रसाद साहू को 2138593, अरविंद शर्मा को 2379635, महाजन निषाद को 2853314, देवचंद्र वर्मा को 6214074, प्रकाश शर्मा को 358610, नकुलराम साहू को 2059304 रूपए व्यावसायिक अग्रिम आहरण किया गया।
जांच की खानापूर्ति
पिछले दिनों युवक कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक नितिन भंसाली ने सहकारिता मंत्री ननकीराम कंवर से शिकायत की और गोलमाल के खेल में शामिल अधिकारियों की संपत्ति सार्वजनिक किए जाने की मांग की। धान के फर्जी ऑर्डर और भूसा खरीदी में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद भी अफसर को प्रमोट कर दिया गया। ऎसे ही एक मामले में निलंबित अधिकारी को फिर से जिला विपणन अधिकारी बना दिया।
एक अन्य अपात्र अधिकारी जो कि महज गोदाम प्रभारी था, उसे डीएमओ बना दिया गया। जाहिर है उन्हें निश्चित तौर पर ऊपरी संरक्षण हासिल है।
गड़बडियों के कारण विवादों में
मार्कफेड गड़बडियों के कारण अक्सर विवादों में रहता है। एक के बाद एक इसके कई कारनामे उजागर हो चुके हैं। अग्रिम आहरण के खेल के पीछे पोस्टिंग-प्रमोशन वजह बताई जा रही है। संग्रहण केंद्रों के ऎसे प्रभारी जो मनचाही जगह पर बने रहने अथवा वहां तक जाने के लिए मार्कफेड के उच्च पदस्थ लोगों को खुश करना होता है।
मुझे जानकारी नहीं
धान संग्रहण केंद्रों में अग्रिम आहरण संबंधी जानकारी मुझे नहीं है। पूरे मामले को दिखवाएंगे। अगर जांच में कोई गड़बड़ी पाई गई तो दोçष्ायों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राधाकृष्ण गुप्ता अध्यक्ष, मार्कफेड
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