कभी तो इतना शरीफ हों जाता था कि चोरों और डाकुओं को भी जी लगाकर बोलता था (लादेन जी इत्यादि )
तो कभी इतना उद्दंड हों जाता था कि साधुओं के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग (हिन्दू आतंकवाद, साध्वी प्रज्ञा आतंकवादी हैं इत्यादि) करता था
पर अपनी इटेलियन मम्मी कि हर बात मानता था,
एक दिन पत्नी के साथ घरेलू सामान खरीदने गया, पत्नी ने आलू के भाव पूँछे तो सब्जी वाले ने बताया २० रूपये किलो, इस पर वो महानुभाव बोले तुम ठग रहे हों मेरी मम्मी ने वताया है कि आलू १० रूपये प्रति किलो हैं, इसी प्रकार गोभी, मटर, टमाटर, मेथी, प्याज लहसन, बैंगन इत्यादि के साथ भी हुआ,
पत्नी को बहुत गुस्सा आया, सामने से ही संघ का जुलुस गुजर रहा था, पत्नी ने क्रोधावेश में स्वयमसेवक से झंडा छीनकर उसकी पिटाई शुरू कर दी, वो व्यक्ति व्न्द्रों कि तरह उछल कूद करके खुद को बचाने का प्रयत्न करने लगा, अंततः स्वय्म्सेवको ने उसे बचा लिया
उस दिन के बाद उसे हर जगह स्वयंसेवक ही स्वयंसेवक नजर आने लगे, चाहे कहीं भी कोई अप्रिय घटना घटे वो व्यक्ति १ ही तोतारटंत बोलता है कि "इसमें संघ का हाथ है".
क्या आप मुझे बताएंगे कि ये महानुभाव कौन हैं
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