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Monday, January 16, 2012

पूरे देश में संविलियन, पर छत्तीसगढ़ में ही दिक्कत

पूरे देश में संविलियन, पर छत्तीसगढ़ में ही दिक्कत
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का प्रमुख दारोमदार संभाले पौने दो लाख शिक्षाकर्मियों के सम्मानजनक वेतन, संविलियन सहित अन्य मांगों के संतोषजनक हल के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट फरवरी महीने की तीन-चार तारीख  तक आने की उम्मीद है। अलबत्ता, हाईपावर कमेटी के इतर प्रदेश के शिक्षाकर्मी संघ के नेताओं ने भी अपनी एक कमेटी गठित कर देश के आठ बड़े राज्यों की स्थिति का अध्ययन किया है। जिसके अनुसार देश के ज्यादातर् राज्य पैरा शिक्षकों को नियमित कर उन्हें बेहतर वेतन दे रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं हो रहा। शिक्षाकर्मियों की रिपोर्ट 8 बड़े राज्यों का दौरा कर वहां पैरा शिक्षकों की स्थिति, सेवा शर्तो और वेतन की पड़ताल कर तैयार की।
यहंा उल्लेख करना लाजि़मी होगा कि वैश्विक मंदी के दौर में विकसित देशों ने अपने खर्चों में कटौती करना शुरू तो किया, पर स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे बुनियादी जनक्षेत्रों पर इसका असर पडऩे नहीं दिया। उन देशों में स्वास्थ्य व शिक्षा में कटौती कभी स्वीकार नहीं किया गया। जबकि, हमारे देश में शायद राज्य से लेकर राज्य सरकार तक की नजर में शिक्षा अति महत्वपूर्ण बुनियादी अवश्यकता नहीं है। यहंा तक कि प्रशासन के विकासखंड स्तर के अधिकारी से लेकर बाबू भी शिक्षाकर्मियों को समय पर वेतन देने में भारी कोताही बरतते हैं। कई दफे तो जानबुझकर महीनों तक वेतन लटका कर रखा जाता है।
किस राज्य में कैसी सुविधा

उड़ीसा:
यहां पैरा शिक्षकों को शिक्षा सहायक कहा जाता है। निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर प्रशिक्षित शिक्षा सहायक की नियुक्ति पैरा शिक्षक के रूम में सर्वशिक्षा अभियान के तहत जिला परिषद द्वारा अनुबंध के आधार पर की जाती है। 3 साल के संतोषजनक प्रोबेशन के बाद उन्हें फिर से 3 साल के प्रोबेशन पर रखा जाता है। इसके बाद उन्हें प्राइमरी स्कूल में नियमित शिक्षक के तौर पर नियुक्त कर दिया जाता है।

आंध्र प्रदेश:
 यहां पैरा शिक्षकों को विद्या वॉलिंटियर्स कहा जाता है। शुरुआत में इनकी नियुक्ति 1000 से 1500 रुपए के फिक्स पेमेंट पर होती है। 2 साल की अप्रेंटिसशिप के बाद उन्हें नियमित वेतनमान पर नौकरी दे दी जाती है।
महाराष्ट्र: यहां पैरा शिक्षकों को शिक्षा सेवक कहा जाता है। शुरुआत में उन्हें 3 हजार रुपए का तय वेतन मिलता है। 3 साल तक संतोषजनक काम के बाद उन्हें स्थायी शिक्षक के रूप में प्रमोट कर दिया जाता है। फिर उन्हें नियमित शिक्षक के बराबर वेतन और दूसरी सुविधाएं मिलने लगती हैं।
गुजरात:
 इस राज्य में पैरा टीचर्स को विद्या सहायक के तौर पर नियुक्ति दी जाती है। 1998 से 2010 के बीच राज्य में कुल 1,21,358 विद्या सहायकों की नियुक्ति राज्य सरकार कर चुकी है। इनमें से 85,194 विद्या सहायकों का नियमित वेतनमान पर संविलियन भी हो गया है।

झारखंड:
 यहां पैरा शिक्षकों की तीन कैटेगरी है। उन्हें अतिरिक्त पैरा टीचर्स, महिला पैरा टीचर्स और व्यायाम पैरा टीचर्स के पद पर रखा जाता है। कुछ समय पहले संविलियन के लिए यहां बड़ा आंदोलन हुआ था। इसके बाद सरकार ने स्थायी प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती में 50 फ ीसदी पद पैरा टीचर्स के लिए आरक्षित करने का ऐलान किया है।

उत्तर प्रदेश:
यूपी में पैरा टीचर्स को शिक्षा मित्र कहा जाता है। शिक्षा मित्र भी संविलियन की मांग कर रहे थे। इस पर सरकार ने जुलाई 2011 में केबिनेट की बैठक में इस पर फैसला ले लिया। इसका क्रियान्वयन जारी है।
केरल: यहां पैरा शिक्षकों को प्रोटेस्टेड टीचर कहा जाता है। यहां शिक्षा के अधिकार के तहत शासकीय शिक्षक बनाने का आदेश जारी कर दिया गया है।
राजस्थान:
 यहां पैरा शिक्षकों को शिक्षा सहयोगी कहा जाता है। उन्हें प्राइमरी के लिए पहले 8 हजार रुपए मिलते थे। अब शिक्षा का अधिकार कानून के तहत उन्हें पुनरीक्षित वेतनमान और बेहतर सुविधाएं देने का फैसला सरकार ने ले लिया है।

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