इस सृष्टि में कोई भी मनुष्य पूर्णतः निष्पाप निर्मल निर्दोष नहीं है और न ही होगा|
फिर विरोध प्रदर्शन में मर्यादा को लांघना, किसी के नीजी जीवन से सम्बंधित आपतिजनक संभाषण देना क्या उचित है ???
आज की पीढ़ी में एक यही कमी है की वो उग्रता को, बहकावे और भड़काऊ भाषणबाज को देश का सच्चा भक्त मान लेती है|
वास्तव में भेड़ चाल शुरू हो जाती है|
सभी के लेखन में भाषण में वही उग्रता, अमर्यादा...
एक सच्चा राजा प्रजा को बहका कर डराकर धमकाकर नहीं जीतता, वह तो चोट खाने पर भी सच को सम्मान दिलाता है और प्रजा के मन में भी सच को स्थान दिलाता है| दुःख होता है आज की युवा पीढ़ी को यु भटकते देखने पर,
आज के युवा पत्रकार तो मानो विश्लेषण, चिंतन, संशोधन जैसे शब्दों को भुला बैठे है और बस वो भी वर्तमान की मार खाए हुए बैल की भाति एक ही भाषा एक ही दिशा में चल रहे है|
No comments:
Post a Comment
http://rktikariha.blogspot.com/