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Tuesday, October 18, 2011

आशा


ज़िन्दगी सिखलाती है।
आशा बंधते बधते,
टूट जाती है।

1 comment:

  1. कल तक कुछ चेतना शास्त्री टाईप के लोग चिल्ला रहे थे कि रालेगाँव के सरपंच और बबलू की मुलाकात से अन्ना की असलियत सामने आ गई और अब चिल्ला रहें हैं बबलू ने उनसे ना मिल कर अन्ना का अपमान किया .....समझ में नहीं आता इन दोनो स्थितियों में देश हित का क्या मामला बनता है ऐसा लगता है अब इस देश की सारी विकास धारा अन्ना के खेत से ही होकर बहेगी ..

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