दक्षिणी चीन के समुद्र में दो वियतनामी ब्लॉक में भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) के तेल और प्राकृतिक गैस खोजने के अभियान में खलल डाला गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि चीन की आपत्ति का कोई कानूनी आधार नहीं है, क्योंकि जहां तेल-गैस निकाला जा रहा है वो ब्लॉक वियतनाम का है। बीजिंग ने इस मामले में डिमार्शे के जरिए राजनयिक स्तर पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि चीन की इजाजत के बिना ब्लॉक नंबर 127 और 128 में ओवीएल की कोई भी गतिविधि गैरकानूनी मानी जाएगी। विदेश मंत्रालय ने चीन के डिमार्शे का औपचारिक जवाब दे दिया है। दक्षिणी चीन के समुद्र में तेल और गैस से समृद्ध कई द्वीप हैं। लेकिन इनमें से ज़्यादातर सीमा विवाद में उलझे हुए हैं। इन द्वीपों पर चीन के अलावा वियतनाम समेत कई देश दावेदारी करते हैं।
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Friday, September 16, 2011
चीन ने दिखाई दादागीरी, ओएनजीसी का काम रुकवाया
दक्षिणी चीन के समुद्र में दो वियतनामी ब्लॉक में भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) के तेल और प्राकृतिक गैस खोजने के अभियान में खलल डाला गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि चीन की आपत्ति का कोई कानूनी आधार नहीं है, क्योंकि जहां तेल-गैस निकाला जा रहा है वो ब्लॉक वियतनाम का है। बीजिंग ने इस मामले में डिमार्शे के जरिए राजनयिक स्तर पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि चीन की इजाजत के बिना ब्लॉक नंबर 127 और 128 में ओवीएल की कोई भी गतिविधि गैरकानूनी मानी जाएगी। विदेश मंत्रालय ने चीन के डिमार्शे का औपचारिक जवाब दे दिया है। दक्षिणी चीन के समुद्र में तेल और गैस से समृद्ध कई द्वीप हैं। लेकिन इनमें से ज़्यादातर सीमा विवाद में उलझे हुए हैं। इन द्वीपों पर चीन के अलावा वियतनाम समेत कई देश दावेदारी करते हैं।
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