जीवन भी है लाचार और मारा मारा ...,
हर शख्स है किसी न किसी फेर में
जिन्दगी लाचार सी कचरे के ढेर में ...,
उम्मीदों से लालच की राह पे चलती
चाह जवानी की, मगर नित ढलती ........,
बचने की लाख कोशिश सब करना
मगर पड़ेगा सबको हिसाब भी भरना
जब एक दिन है सबको ही मरना
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