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Thursday, September 15, 2011

बालोद को आदिवासी जिला घोषित करने प्रधानमंत्री से फरियाद

बालोद को आदिवासी जिला घोषित करने प्रधानमंत्री से फरियाद
-क्षेत्र की 70 फीसद आबादी आदिवासी
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दुर्ग। नवगठित बालोद जिले को आदिवासी जिला बनाने या आदिवासी उपयोजना में जोडऩे की मंाग डौंडीलोहारा, बालोद व गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के अलावा अन्य समाज के लोगों ने रखी है। इस संबंध में प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह को एक संयुक्त ज्ञापन प्रेषित कर पूर्व विधायक लाल महेंद्र सिंह टेकाम सहित एक दर्जन से अधिक जनप्रतिनिधियों ने गुजारिश की है कि नवगठित बालोद जिले की लगभग 70 फीसद आबादी आदिवासियों की है। बालोद जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में आदिवासी संस्कृति एवं परंपरा की अविरल धारा महसूस की जा सकती है। व्यापक राज्य व्यवस्था वाले डौंडीलोहारा राजपरिवार प्राचीन काल से ही चली आ रही संस्कृतिक विरासत की वर्तमान कड़ी है।
पूर्व विधायक लाल महेंद्र सिंह टेकाम के अलावा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि तुलसीराम मरकाम, अर्जुन सिंह कोर्राम, श्रीमती लता देवी कोर्राम, देवेंद्र कुमार, अनिला भेडिय़ा, सोमेश साहू, गोपाल साहू, शब्बीर खान, देवेंद्र धरमगुड़ी, अनिल सुथार, इकबाल अरोरा, देवलाल ठाकुर, नारद गावड़े तथा गिरधर ठाकुर ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कहा है कि संपूर्ण बालोद क्षेत्र सघन वन, खनिज संपदा व जल संसाधन से लबरेज है। उक्त तीनों विधानसभा क्षेत्र के कमोबेश सभी ग्रामीण व नगरीय निकाय क्षेत्रों में प्रमुख देवी-देवता आदिवासियों की प्राचीनतम आराध्य व आस्था का केंद्र है। आज भी हर एक गांव व शहर मेूं मुख्य देव भूमिहार ठाकुर देव आदिवासी सियानों के नाम से प्रथम पूजा अर्चना का रिवाज क्षेत्र के आदिवासी समाज में सदियों से चली आ रही है। आदिवासियों की इन तीनों विधानसभा क्षेत्र में प्राचीन व ख्यातिलब्ध देवी-देवताओं के मंदिर स्थित है। इनमें डौंडीलोहारा क्षेंत्र का महामाया मंदिर, शिकारी बाबा देवगुड़ी दल्ली राजहरा, मंगतु बाब ा का देव मंदिर कमकापार एवं जामड़ी पाठ देवस्थल प्रसिद्ध हैंं। बालोद क्षेत्र में प्रसिद्ध सियादाई मंदिर तथा भोथली स्थित आदिशक्ति बुढ़ादेव मंदिर प्रमुख है। इसी तरह गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी संस्कृति व भक्ति आस्था का प्रतीक विस्तृत तौर पर नजर आता है। पैरी का गौरय्य मैय्य मंदिर पूरे राज्य में प्रसिद्ध है।
जारी बयान में आगे कहा गया है कि डौंडीलोाहरा विधानसभा क्षेेत्र के लौहनगरी दल्ली राजहरा, बीएसपी की जीवन दायिनी के रूप में देश-विदेश में विख्यात है। अभीा दो-तीन वर्ष पहले ही वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट में इस क्षेत्र के ग्राम नलपानपी में दुनिया के सबसे बहुमूल्य धातु युरेनियम का भंडार मिला है, जो बालोद ही नहीं बल्कि पूरे देश को विशेष पहचान दिलाएगा। 1957 से सूचीबद्ध किए जा रहे यहां के खनिज संपदा व वन संपदा आदि की सकल उत्पाादन व संवद्र्धन से पता चलता है कि देश की उत्पादन व लाभांश सर्वोच्च स्थान पर रहा है, किंतु आज भी इस क्षेत्र के अधिकाश भाग विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। अलबत्ता, यदि बालोद को आदिवासी जिला या आदिवासी उपयोजना के तहत जोड़ दिया जाए, तो क्षेत्र में चतुर्दिक विकास की राह प्रशस्त होगी। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर पुन: अपील की है कि अत्यंत गंभीर व जायज मांग पत्र पर विशेष रूचि लेकर नवगठित बालोद जिले को आदिवासी जिला या आदिवासी उपयोजना में शामिल करें।
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सौ प्रतिशत मतदाता परिचय पत्र इस बार होगा अनिवार्य
0 जिले में विभाजन के बाद मतदाताओं की संख्या घटी
दुर्ग। मान्यता प्राप्त राजनैतिक चलों की उपस्थिति में निर्वाचन नामावली संक्षिप्त पुर्नरीक्षण की बैठक में कई बिन्दुओं पर चर्चा हुई। निर्वाचक नामावलियों का संक्षिप्त पुनरीक्षण 2012 के अंतर्गत दावा आपत्ति का कार्य सभी मतदान केन्द्रों में 1 अक्टूबर से 1 नवंबर तक की अवधि में किया जायेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार कुजूर के आदेश से मतदान केन्द्रों का पूर्नगठन किया गया है। इसके अनुसार दुर्ग जिले में  संजारी बालोद के 2 मतदान केन्द्र, डौण्डीलोहारा के 2 मतदान केन्द्र, वैशाली नगर के 2 मतदान केन्द्र, अहिवारा के 5 मतदान केन्द्र एवं बेमेतरा के 1 मतदान केन्द्र सहित कुल 12 मतदान केन्द्रों को नया बनाया जायेगा।
संयुक्त कलेक्टर सिद्धार्थ दास ने निर्वाचन नामावली का एजेण्डा बताया कि 9, 16 व 23 अक्टूबर को विशेष अभियान दिवस होगा। जिसमें बुथ लेबल एजेण्ट के साथ दावा-आपत्ति प्राप्त करने का कार्य किया जाना है। प्रत्येक मतदान केन्द्र  के लिए किसी शासकीय व्यक्ति को बीएलए के रूप में नियुक्त किया जाना है।
वर्तमान में जिले में कुल मतदान केन्दों की संख्या 2556 हे। भारत निर्वाचन आयोग नईदिल्ली द्वारा 12 नए मतदान केन्द्र बनने से जिले के कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 2568 हो जायेंगे। मतदाता परिचय पत्र निर्माण का कार्य जारी है। मतदाता अपनी फोटो तहसीलदार अथवा मतदान केन्द्र के बीएलओ के पास जमा कर सकते हैं।

दुर्ग जिले का एक जनवरी को नए जिलों में विभाजन हो रहा है। विभाजन के पहले दुर्ग जिले में मतदाताओं की संख्या 33 लाख 43 हजार थी। विभाजन के बाद मतदाताओं की संख्या 14 लाख हो जायगी। भारत निर्वाचन आयोग का टोलफ्री नंबर 1950 है। किसी मतदाता को अगर चुनाव संबंधित कोई भी शिकायत हो तो दर्ज करने पर 21 दिन में समाधान हो जायेगा।
 5 जनवरी 2012 को प्रकाशित मतदाता सूची पर ही लोकसभा चुनाव तय सभी राजनैतिक पार्टियां 25 सितंबर से पूर्व अपनी बीएसए सूची प्रशासन को दे दगी। बैठक में भाजपा से राजेन्द्र पाध्ये, कांगे्रस से राजेन्द्र द्विवेदी,  तुलसी साहू, बसपा से बंटी चौरे, सीपीआई से वकील भारती एवं मानिकराव गवई उपस्थित थे। अविभाजित दुर्ग जिले में मतदाताओं की कुल संख्या 33 लाख 43 हजार  है, विभाजन के बाद जो 14 लाख हो जाएगा।
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