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Monday, August 15, 2011

क्या हमारी अंतरात्मा अनुमति देगी इस ‘राष्ट्र-गान’ के सम्मान में खड़े होने को…?

मैं बचपन से ही सोचता आया था कि आखिर ये कौन ‘अधिनायक’ और ‘भारत भाग्य विधाता’ हैं जिनके जयघोष से हम अपने राष्ट्रगान की शुरुआत करते हैं?
मुझे लगता था यह मातृभूमि भारत का ही नाम होगा, लेकिन हाल में एक मित्र के साथ इस पर चर्चा छिड़ी तो कई बातें सामने आईं…
जरा आप भी गौर करें…
शुरुआत करें इसके इतिहास से…
1- जन गण मन.. को नोबल विजेता गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने 1919 में लिखा था जब किंग जॉर्ज पंचम के सम्मान में जब वे महारानी के साथ भारत पधारे थे। कहा जाता है कि नेहरू पिता-पुत्र (पंडित मोती लाल और पंडित जवाहरलाल )  ने इसमें पांच और अंतरे जुड़वाए थे जो किंग और क्वीन के सम्मान में थे।
2- इसके मूल बंगाली संस्करण में भी सिर्फ पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा.. आदि राज्यों का उल्लेख था जो सीधे ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन थे। गौर करने वाली बात है कि कश्मीर, राजस्थान आंध्र, मैसूर केरल आदि किसी भी देसी रियासत या राज्य का जिक्र नहीं था जो कि तब भी अखंड भारत के महत्वपूर्ण अंग थे। हिंद महासागर और अरब सागर का भी जिक्र नहीं है जो उस वक्त सीधे तौर पर पुर्तगालियों के नियंत्रण में थे।
3- ‘जन गण मन अधिनायक’ सीधे तौर पर जॉर्ज पंचम को बुलाया गया था जो भारत के भाग्य विधाता थे। अगले अंतरों के भी अर्थ उन्हीं का महिमा मंडन करते हैं।
4- पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल-बंग विंध्य हिमांचल जमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग… इन सभी राज्यों, पर्वतों और नदियों के तट पर रहने वाले आपके आशीर्वचनों के अभिलाषी हैं।
5- तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मांगे, गाये तव जय गाथा… (भारतीय) लोग आपका शुभ नाम लेते हुए जागते हैं और आपसे शुभ आशीर्वाद मांगते हैं। इसके बाद आपकी जयगाथा गाते हैं।
6- जन गण मंगल दायक जय हे भारत भाग्य विधाता… हे (भारतीय) जन गण को मंगल प्रदान करने वाले, हे भारत के भाग्य विधाता, आपकी जय हो.. जय हो, जय हो, जय हो.. हर तरफ जय ही जय हो
पूरी कविता में कहीं भी भारत का नहीं भारत भाग्य विधाता का गुणगान है जो जॉर्ज़ पंचम को बुलाया गया था। ये मातृभूमि की वंदना नहीं, बल्कि महारानी और महाराजा का गुणगान था।
आगे से जब भी आप राष्ट्रगान के तौर पर जन गण मन अधिनायक दोहराएं, एक बार विचार अवश्य करें कि पिछले साठ वर्षों से भी अधिक समय से आखिर किसकी जय कर रहे हैं…
हम डेढ़ अरब भारतवासी?
क्या हम कभी समझ पाएंगे ???

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