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Sunday, August 28, 2011

इसलिए मैंने मांगना ही छोड़ दिया

Dekha hai Zindagi ko kuch itne kareeb se.... that I have stopped judging people...concentrate only on yr conduct....how others behave,try to show t way n then it is their problem or Gods.....!!Does judging others help ?

देखा है जिन्दगी को
कुछ इतने करीब से
कि..
मैंने लोगो पर फैसला करना बंद कर दिया
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दरअसल
 
मुझे वह न मिला , जो मै चाहता था
बल्कि वह मिला जो मुझे चाहिए था
मसलन ,
.. खुसिया मांगी
तब उसने दुःख भेजी , ताकि मै खुशियों की कीमत समझ सकूँ  .

                   मैंने प्यार चाहा  , तो वहां से  बेवफाई आयी  ,
इसलिए,  ताकि मै
.. दुनिया को पहचान  सकूँ  .
और ऎसी ही बहुत सी बाते ओउर हुयी

इसलिए मैंने मांगना ही छोड़ दिया

अब उस पे भरोसा है कि वह सब देख सुन रहा है
मुझे मांगने की जरुरत नहीं
वह ऐसे ही दे देगा

1 comment:

  1. मैं भी आजकल इसी कविता वाली मानसिक स्थिति से गुजर रही हूँ.

    अच्छी कविता लिखी आपने

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