
देखा है जिन्दगी को
कुछ इतने करीब से
कि..
मैंने लोगो पर फैसला करना बंद कर दिया
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दरअसल
मुझे वह न मिला , जो मै चाहता था
बल्कि वह मिला जो मुझे चाहिए था
मसलन ,
.. खुसिया मांगी
तब उसने दुःख भेजी , ताकि मै खुशियों की कीमत समझ सकूँ .
मैंने प्यार चाहा , तो वहां से बेवफाई आयी ,
इसलिए, ताकि मै
.. दुनिया को पहचान सकूँ .
और ऎसी ही बहुत सी बाते ओउर हुयी
इसलिए मैंने मांगना ही छोड़ दिया
अब उस पे भरोसा है कि वह सब देख सुन रहा है
मुझे मांगने की जरुरत नहीं
वह ऐसे ही दे देगा
मैं भी आजकल इसी कविता वाली मानसिक स्थिति से गुजर रही हूँ.
ReplyDeleteअच्छी कविता लिखी आपने