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Friday, June 17, 2011

ये ज़िन्दगी है

माना की तुने बहुत ग़मों को झेले हैं
ज़िन्दगी ने दिए धोखे और
अपनों ने भी तुझसे मुह फेरे हैं
पर तू ये क्यूँ भूल जाता है की
ये ज़िन्दगी है
यहाँ तो कभी गम के मंज़र
तो कभी खुशियों के मेले हैं
आज गर तू निराश है तो
कल तेरा दिन भी आएगा
आज अगर वक़्त तुझसे रूठा है
तो कल ये वक़्त भी बदल जायेगा
तो तू अपने दिल को न सजा दे
न बन गुमशुदा दर्द में
दू भी ज़िन्दगी का मज़ा ले
भूल जा सितम को बस आगे बढ़ते जा
हर हाल में कर्तव्यों को पूरा करते जा
एक दिन तू भी खुशियाँ पायेगा
जो हैं आज तुझसे जुदा जुदा
उनकी मोहब्बत भी पायेगा
तू मत हो निराश यूँ की तेरी भी पहचान होगी
एक दिन ये दुनिया तुझे चाहेगी
वो तेरी भी कदरदान होगी
बस ये जान ले की कुछ सपनो के टूटने से
तू नहीं रूक सकता
तेरा हौसला इतनी ज़ल्दी नहीं झुक सकता
तुझमे सामर्थ्य है तू जरूर अपनी मंजिल पायेगा
तू बस प्रयत्न कर
तुझे भी आशियाना मिल जायेगा

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