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Saturday, June 4, 2011

फूलों की घाटी में जवानों की पदचाप

केशकाल .फूलों की घाटी में इन दिनों सुबह से ही फौजी वेशभूषा में जवानों की पदचाप सुनाई देने लगती है। पंचवटी में डेरा डाले सीआरपीएफ के जवान हर सुबह करीब 6 बजे नियमित गश्त पर निकल पड़ते हैं।
जवानों की मदद से ही कई बार घाटी में लगने वाले जाम को दूर किया जाता है जिससे लोगों की परेशानी दूर हो जाती है।
आगे बढ़ा सेना का कारवां
सेना की एक टुकड़ी ने गुरुवार की सुबह 8 बजे कांकेर पहुंच जंगलवार कालेज के निकट पड़ाव डाला था। इसी टुकड़ी से आधे से अधिक जवान शुक्रवार की सुबह 6 बजे बस्तर के लिए रवाना हुए। सेना के शेष जवान तथा वाहन कांकेर पड़ाव मंे ही रूके हुए है। शुक्रवार की सुबह बस्तर रवाना हुई टुकड़ी में दो दर्जन सेना के तथा शेष निजी वाहन थे।
कुछ वाहनों में जवान तथा कुछ में सामान लदे हुए थे। कोंडागांव से लगभग 10 किमी पहले ग्राम जैतगिरी, मसोरा तथा गिरौला के आसपास जंगलों में सेना ने अपना दूसरा पड़ाव डाला। सेना के साथ मौजूद डाग स्क्वाड ने यहां आसपास सर्चिंग की कैंप की तैयारी में जुट गई।
सेना के जवानों को लेकर रवाना हुए कुछ वाहन शाम को खाली कांकेर लौट आए। जवानों को छोड़ कर वापस कांकेर पहुंची वाहनों में से बड़ी संख्या में निजी वाहनों को शाम को रायपुर रवाना कर दिया गया।
निजी वाहन के चालकों ने बताया कि जवानों को कोंडागांव के निकट छोड़कर आए है तथा वापस रायपुर जा रहे है। रायपुर में मौजूद सेना के अन्य जवानों को लेकर वे पुन: कांकेर लौटेंगे।
बस्तर रवाना होने के बाद कांकेर में जंगलवार कालेज के निकट स्थित सेना के पड़ाव में शेष बचे जवान शुक्रवार को अस्थाई निर्माण कार्य में जुटे रहे। सेना के अधिकारियों ने अब तक तो चुप्पी साधी हुई है लेकिन जवानांे द्वारा की जा रही तैयारी से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सेना की कुछ टुकड़ी यहां कैंप कर सकती है।
सेना के कांकेर पहुंचने के दूसरे दिन जवान वाहनों में घुमते भी रहे। जंगलवार कालेज के निकट स्थित सेना के पड़ाव में सेना जवानों ने पूरी मुस्तैदी से सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रखी है। चारांे ओर बारबेट वायर से घिरे सेना के इस पड़ाव का मुख्य द्वार रष्ट्रीय राजमार्ग के सम्मुख है जिसमें हथियार बंद जवानों को तैनात किया गया है।
कैंप के अंदर किसी आम नागरिक तो दूर बिना कारण पुलिस तथा जंगलवार में ट्रेनिंग ले रहे जवानों को भी जाने की अनुमति नहीं है। अंदर का क्षेत्र छोटी-छोटी झाड़ियों से घिरा हुआ है जिसमें सेना के जवानों ने अपने तंबू गाड़ रखे है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजधानी से बस्तर के लिए निकली टीम को कांकेर पंहुचने पर इस पड़ाव में विश्राम कराया जाएगा जिसके बाद अगले दिन उन्हें अगले पड़ाव के लिए रवाना किया जाएगा।

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