छत्तीसगढ़ के सभी गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना को सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है.
आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना जुड़ी बसाहटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना शुरू की जाएगी. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मापदंडों में नहीं आने वाली बसाहटों को इस योजना में जोड़ा जाएगा. रमन मंत्रिपरिषद ने इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है.
अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत बिना जुड़ी बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. इसके लिए तीन वर्ष की कार्य योजना तैयार की गयी है. राज्य शासन ने इस योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए इस वर्ष 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है. लेकिन जरुरी होने पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से ऋण लेकर वर्ष में 750 करोड़ रूपए तक भी व्यय किए जा सकते हैं.
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के तहत प्रस्तावित कायरें में प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की बिना जुड़ी बसाहट को कम से कम एक तरफ से डामरीकृत पक्की सड़क से जोड़ा जाएगा. अपवाद स्वरूप जहां दूसरी तरफ जोड़ने के लिए कम लम्बाई की सड़क बनानी होगी, वहां दोनों तरफ से जोड़ने पर विचार किया जा सकेगा. इसके अलावा 3.75 मीटर चौड़ाई में डामरीकृत या कंक्रीटवाली मार्ग के निर्माण के साथ-साथ कुल साढ़े सात मीटर चौड़ाई की सड़क बनाई जाएगी.
अधिकारियों ने बताया कि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस योजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल साढ़े आठ हजार किलोमीटर लम्बाई की सड़कों के निर्माण का अनुमान लगाया गया है. निर्माण कार्य पर चार हजार 250 करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान है. इसमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत लगभग 20 फीसदी और राज्य का संभावित हिस्सा 80 प्रतिशत होगा. वित्तीय वर्ष 2011-12 में 1500 किलोमीटर लम्बाई की सड़क निर्माण का कार्य प्रस्तावित है.
उन्होंने बताया कि राज्य में पिछले 10 सालों से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना क्रियान्वित की जा रही है.
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत प्रत्येक बसाहट को जोड़ने के लिए मिट्टी-मुर्रम की सड़कें बनाई जा रही है.
अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत बिना जुड़ी बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. इसके लिए तीन वर्ष की कार्य योजना तैयार की गयी है. राज्य शासन ने इस योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए इस वर्ष 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है. लेकिन जरुरी होने पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से ऋण लेकर वर्ष में 750 करोड़ रूपए तक भी व्यय किए जा सकते हैं.
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के तहत प्रस्तावित कायरें में प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की बिना जुड़ी बसाहट को कम से कम एक तरफ से डामरीकृत पक्की सड़क से जोड़ा जाएगा. अपवाद स्वरूप जहां दूसरी तरफ जोड़ने के लिए कम लम्बाई की सड़क बनानी होगी, वहां दोनों तरफ से जोड़ने पर विचार किया जा सकेगा. इसके अलावा 3.75 मीटर चौड़ाई में डामरीकृत या कंक्रीटवाली मार्ग के निर्माण के साथ-साथ कुल साढ़े सात मीटर चौड़ाई की सड़क बनाई जाएगी.
अधिकारियों ने बताया कि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस योजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल साढ़े आठ हजार किलोमीटर लम्बाई की सड़कों के निर्माण का अनुमान लगाया गया है. निर्माण कार्य पर चार हजार 250 करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान है. इसमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत लगभग 20 फीसदी और राज्य का संभावित हिस्सा 80 प्रतिशत होगा. वित्तीय वर्ष 2011-12 में 1500 किलोमीटर लम्बाई की सड़क निर्माण का कार्य प्रस्तावित है.
उन्होंने बताया कि राज्य में पिछले 10 सालों से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना क्रियान्वित की जा रही है.
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत प्रत्येक बसाहट को जोड़ने के लिए मिट्टी-मुर्रम की सड़कें बनाई जा रही है.
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