DURGWALA
अधूरे-पूरे सपनो का शहर
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Monday, April 25, 2011
नफरत
हाँ, हो सकता हूँ गुनाहगार
इस दुनिया कि नज़र में,
क्या करू वक्त संग बदलना ही नहीं आता मुझे
न जिन्दगी से
शिकवा
न मौत से
शिकायत
मुझे तो नफरत है
उन चाँद उजालों से
जो पल भर का
अँधेरा मिटाकर
तोड़ देते हैं
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