अमिताभ बच्चन का मशहूर कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। इसी के साथ मोबाइल सर्विस कंपनी आइडिया के न सिर्फ सिम, अपितु टाप-अप व रिचार्ज कराने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। केबीसी में लिजेंड पर्सन अमिताभ बच्चन के सामने हाट सीट पर बैठने के लिए अवसर फोन की राह से जाते हैं। आजकल केबीसी मोबाइल फोन के जरिये सवालों के जवाब देने पर लाख भर रूपए का ईनाम भी दिया जा रहा है। केबीसी से एक करोड़ रुपया जीतना भले ही एक दुर्लभ हो सकता है, पर मोबाइल पर आन द लाईन जवाब देने पर एक लाख रु जीतने की ख्वाब सच की जमीन से ज्यादा दूर भी नहीं। यूं तो केबीसी के इतिहास में छत्तीसगढ़ से दो-तीन लोगों को छोड़कर आज तक किसी को हाट सीट में बैठने का सौभाग्य नहीं मिला है। पर ग्राम थनौद का एक युवक जब केबीसी से कुछ लाख रूपए जीत कर वापस लौटा, तो करीब हप्ते भर तक सामाजिक एवं गैराजनीतिक संगठनों द्वारा लगातार सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा। इस वाकये से समझा जा सकता है कि केबीसी में रुपया जीतने पर रूपया तो मिलता ही है, साथ में ऐतिहासिक किस्म का सम्मान भी मिल सकता है।
अब चंूकि केबीसी पुन: आरंभ हो रहा है। ऐसे में हजारों लोग फिर से अपनी तैयारियों में जुट गए हैँ। प्रदेश के मंत्रालय, रायपुर में संविदा नौकरी करने वाले वेदप्रकाश वर्मा को तो मानो सपनों को सच बनाने की नई राह मिल गई है। उसने आइडिया का सिम खरीद कर पांच सौ रूपए मूल्य का एक पैकेज खरीदा है। ट्रेन में आते-जाते और कभी भी कुछ खाली समय मिलता है, वह केबीसी में फोन लगाने में मशगूल हो जाता है। इसके पहले भी वह ऐसा प्रयास करता रहा है, पर सफलता हाथ नहीं आ सका। पर उसे यकीन है कि कभी न कभी उसका नंबर भी लग ही जाएगा।
बेरला ब्लाक में पदस्थ शिक्षाकर्मी गजाधर वर्मा भी उन्हीं लोगों में से एक है, जो केबीसी के जरिये एक क्षण में अपनी किस्मत बदल देना चाहते हैं। इनका मानना है कि केबीसी में लगने वाले अधिकांश नंबर आइडिया की सर्विस से किए जाते हैँ। अतएव उसने भी आइडिया का एक सिम खरीद लिया है। जब तक केबीसी चलता रहेगा, वह पांच सौ से एक हजार रू महीना पैकेज डलाते रहेगा। दरअसल, केबीसी में कांटेक्ट के लिए दिखाए जाने वाला दोनों नंबर आइडिया सर्विस के है, इसलिए केबीसी में जाने के लिए वह आइडिया को शुरूआती कड़ी मानता है। उक्त शिक्षाकर्मी केबीसी चलने के दौरान कई सालों से यह प्रयास करते आ रहे हैँ। उन्होंने बताया कि इसके पहले केबीसी-4 में एक दफा उनका नंबर अमिताभ बच्चन को लग भी गया था, पर बात पूरी तरह नहीं बन सकी थी। लेकिन अब वह कोई चूक नहीं करना चाहता।
अमिताभ बच्चन के कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति की वर्तमान सामाजिक मूल्य का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि इस पर बनी फिल्म स्लमडाग मिलेनियर आस्कर अवार्ड भी फतह कर चुका है। राजिम नवापारा निवासी आशिष दीवान रायपुर के सत्र न्यायालय में वकीली करते हैँ। ज्ञान बढ़ाने की गरज से वे केबीसी का कोई भी एपीसोड नहीं छोड़ते। साथ ही अभिताभ के सामने हाट सीट पर बैठने का लगातार प्रयास करते हैँ। यद्यपि अपने प्रयासों में वे अभी तक मुकम्मल नहीं हो पाए हैं, पर अपने इस उम्मीद के चिराग पर उन्होंने भी हजार रूपए महीना का तेल डालना शुरू कर दिया है। अमूमन, वे इस बात से इत्तफाक नहीं रखते कि केबीसी में आइडिया से ही लाईन कनेक्ट होता है, वे आइडिया के बजाए रिम का इस्तेमाल करते हैँ।
कालेज स्टूडेंट प्राची राठौर अपने ज्ञान को निरंतर पुष्ट करते रहने की हिमायती हैं। वह केबीसी के नंबरों पर अवसर का तलाश तो करती हैं, पर उसके मूल में रुपयो का लालच नहीं। बीएससी फाइनल की स्टूडेंट प्राची कहती है कि वह आगे चलकर कई प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना करेंगी। केबीसी में सक्रियता से ज्ञान तो बढ़ाती ही है साथ ही अपनी किस्मत को भी आजमा लेती है।
छग विद्युत मंडल के राका (जिला बेमेतरा) सबडिविजन में जूनियर इंजीनियर रोशनी परमार भी लगातार केबीसी के लाईन्स पर फोन करते रहती हैँ। नौकरी में आने के पहले वह केबीसी में प्रयास नहीं करती थी, पर अब लगातार मोबाइल लगाते रहती है। उसे विश्वास है कि कभी न कभी वह केबीसी में अभिताभ बच्चन के सामने हाट सीट पर जरूर बैंठेगी। यह उसके जीवन का अहम सपना भी है।
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