लंदन/ वाशिंगटन। वैज्ञानिकों ने नए शोधों में पाया है कि किसी महिला का एक विशेष ब्लड गु्रप होने से यह उसकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है और उसके मां बनने के अवसरों को भी सीमित करता है।
शोध में पाया गया कि ओ ब्लड ग्रुप की महिलाओं के लिए गर्भवती होना मुश्किल होता है क्योंकि उनके गर्भाशय में कम अंडे बनते हैं और वे भी खराब गुणवत्ता के। लेकिन इसके जिन महिलाओं का ब्लड ग्रुप ए होता है उनकी प्रजनन संभावनाएं ज्यादा बेहतर होती हैं।
ऎसे हुआ प्रयोग
याले यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क के अल्बर्ट आइंसटाइन कालेज ऑफ मेडिसिन के शोधकताकर्ताओं ने गर्भधारण करने के लिए उपचार हासिल कर रही 560 महिलाओं का परीक्षण किया जिनकी औसत आयु 35 वर्ष थी।
याले यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क के अल्बर्ट आइंसटाइन कालेज ऑफ मेडिसिन के शोधकताकर्ताओं ने गर्भधारण करने के लिए उपचार हासिल कर रही 560 महिलाओं का परीक्षण किया जिनकी औसत आयु 35 वर्ष थी।
शोधकर्ताओं ने प्रजनन क्षमता का मापदंड माने जाने वाले फोलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) का स्तर जांचा। एफएसएच का स्तर दस से अधिक होने से पता चलता है कि गर्भ धारण में दिक्कत होगी। किसी अन्य ब्लड गु्रप की अपेक्षा ओ ब्लड ग्रुप की महिलाओं का एफएसएच स्तर दस से अधिक होने की आशंका अधिक रहती है। प्रमुख शोधकर्ता डा. एडवर्ड नेजात ने बताया कि प्रजनन उपचार हासिल कर रही दोनों रक्त समूहों की महिलाओं में से ओ रक्त समूह की महिलाओं का एफएसएच स्तर दस से अधिक होने की दोगुनी संभावना थी। उन्होंने बताया कि हमने पाया कि ए और ए बी निगेटिव समूह की महिलाएं गर्भ में अंडों की कम संख्या के प्रभाव से मुक्त थीं।
अब पहले से कहीं ज्यादा बेहतर होंगे रोबोट
रोबोटों के जरिए मानवों के काम को आसान बनाने के बाद वैज्ञानिक इनको ज्यादा एडवांस करने जा रहे हैं। वैज्ञानिक एक ऎसे सॉफ्टवेयर का निर्माण कर रहे हैं जिससे रोबोटों को आसानी और बिना गलतियों के मार्गदर्शित किया जा सकेगा। न्यू साउथ वेल्स विवि के मार्क विट्टी के नेतृत्व में एक दल ऎसी प्रणाली पर काम कर रहा है जिससे रोबोट मैपिंग और स्कैनिंग में बहुत शीघ्रता से अपने काम का अंदाजा लगा लेंगे और इससे समुद्री परिवहन संबंघित गलतियों की संभावना बहुत कम हो जाएगी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सॉफ्टवेयर बडे नक्शे को छोटे भागों में बांट देता है और इस बात की जांच करता है कि स्कैनिंग और मैपिंग के दौरान कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई है। इसके बाद यह रोबोट को उसके रास्ते के पुन आकलन की इजाजत देता है ताकि गलतियों को दूर किया जा सके।
रोबोटों के जरिए मानवों के काम को आसान बनाने के बाद वैज्ञानिक इनको ज्यादा एडवांस करने जा रहे हैं। वैज्ञानिक एक ऎसे सॉफ्टवेयर का निर्माण कर रहे हैं जिससे रोबोटों को आसानी और बिना गलतियों के मार्गदर्शित किया जा सकेगा। न्यू साउथ वेल्स विवि के मार्क विट्टी के नेतृत्व में एक दल ऎसी प्रणाली पर काम कर रहा है जिससे रोबोट मैपिंग और स्कैनिंग में बहुत शीघ्रता से अपने काम का अंदाजा लगा लेंगे और इससे समुद्री परिवहन संबंघित गलतियों की संभावना बहुत कम हो जाएगी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सॉफ्टवेयर बडे नक्शे को छोटे भागों में बांट देता है और इस बात की जांच करता है कि स्कैनिंग और मैपिंग के दौरान कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई है। इसके बाद यह रोबोट को उसके रास्ते के पुन आकलन की इजाजत देता है ताकि गलतियों को दूर किया जा सके।
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