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Friday, December 7, 2012

शिक्षाकर्मी हड़ताल

कौन भरेगा पढ़ाई का हर्जाना, पालक चिंतित

 दुर्ग। शिक्षाकर्मियों की हड़ताल को एक सप्ताह पूरा होने वाला है। हड़ताल के चलते बच्चों की पढ़ाई को होने वाले नुकसान से पालक आक्रोशित होने लगे हैँ। पर सरकारी स्तर पर समस्या के समाधान के लिए कोई पहल होते तो नहीं दिख रहा है, पर आंदोलन का राजनीतिकरण जरूर होने लगा है। इसकी शुरूआत अंबिकापुर जिले से हो चुकी है। अंबिकापुर जिला पंचायत के सीईओ द्वारा ेहड़ताल पर गए शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त करने कहा, तो भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष भड़क गए और सीईओ को फटकार भी लगा दी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा विरोध करने से भाजपा संगठन और सरकार दोनों आमने-सामने आ गए। दूसरी ओर सभी जिलों में कांग्रेसी भी शिक्षाकर्मियों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप जड़ दिया है। कांग्रेस के अलावा स्वाभिमान मंच, डेमोके्रटिक पार्टी सरीखे कुछ अन्य पार्टियां भी आंदोलन को समर्थन दे चुकी है। पर प्रदेश सरकार इससे अलहदा दिखता है। लगता है प्रदेश सरकार को न तो लाखों बच्चों की पढ़ाई की फि क्र है और न ही पौने दो लाख शिक्षाकर्मी एवं उनके परिवार के भविष्य की। चुनाव दर चुनाव वादा करने के बावजूद शिक्षाकर्मियों की न वेतन विसंगति दूर हुई और न ही संविलियन या अन्य शर्ते। 17 सालों में शिक्षाकर्मियों की नाम पर 14 कमेटियां बन गई, पर अमल में कोई नहीं आ सका। सिर्फ शिक्षाकर्मी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता भी जानना चाहती है कि आखिर राज्य सरकार व उनके नौकरशाहों की शिक्षाकर्मियों के भविष्य को लेकर क्या नीति और नीयत है। यदि हड़ताल गैरवाजिब है तो शिक्षाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाने में कतई विलंब नहीं किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि अल्प वेतन प्राप्त शिक्ष्ज्ञाकर्मी पारिवारिक व सामाजिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पाने से क्षुब्ध है। सरकार द्वारा बारंबार वादाखिलाफी से वे हताश भी हैं। सवाल सरकार की जनहितैषी नीति और और वादा निभाने की नीयत का भी है। वाजिब मांगों को लंबे समय तक लटकाए जाना किसी के हित में नहीं। स्वयं असुरक्षित भविष्य के बीच जीवन बीताने वाले शिक्षाकर्मी प्रदेश के भविष्य को भली-भांति भला कैसे गढ़ेगा? दिसंबर के महीने में अधिकांश सरकारी स्कूलों में अर्धवार्षिक परीक्षा जैसे-तैसे ली जा रही है। बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई दिसंबर महीने से ही जोर पकड़ती है। ----------- जनप्रतिनिधियों को सौंपा ज्ञापन हड़ताली शिक्षाकर्मी आज केबीनेट मंत्री, सांसद और विधायक के बंगले पर पहुंच कर अपनी मांग संबंधी ज्ञापन सौंपे। सुबह रैली की शक्ल में हड़ताली शिक्षाकर्मी अपने-अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के घर पहुंचे। नेताओं की अनुपस्थिति में उनकी निजी सचिवों एवं निकटतमों को ज्ञापन की प्रतियां सौंपी। रैली में लगभग चार सौ महिला एवं पुरूष शिक्षाकर्मी नारा लगाते हुए नेताओं की घर ज्ञापन सौंपने गए थेे। --- लग सकता है एस्मा यद्यपि शिक्षाकर्मियों के हड़ताल को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है, किंतु स्कूलों की अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था चरमराने से पालक समाज का दबाव बेशक बढ़ रहा है। समय के साथ आंदोलन का राजनीतिकरण भी सरकार के लिए चिंता का सबब बन सकता है। इस सबके मद्देनजर शासन एस्मा की घोषणा सोमवार के बाद कभी भी कर सकता है। एस्मा लागू होने के बाद यदि आंदोलन टूट गया तो सरकार की दिक्कत खत्म हो जाएगी। नहीं होने पर लड़ाई लंबी खिंच सकती है। जिसका खामियाजा सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के अलावा किसी और को नहीं भुगतना पड़ेगा। ------ ----------- केलाबाड़ी का निर्माणाधीन प्रवेश द्वार ढहने से दो जख्मी -उठ रहे सवाल दुर्ग। सुराना कालेज के समीप केलाबाड़ी पहुंच मार्ग पर बनाए जा रहे प्रवेश द्वार का सिनेटरिंग ढहने से दो श्रमिक जख्मी हो गए। घटना अपहरांत चार बजे की है। घायलों में एक महिला एवं एक पुरूष श्रमिक है। हादसे के बाद संजीवनी 108 के जरिये उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया । हादसे की सूचना मिलने से पूर्व विधायक अरूण वोरा, पार्षद अल्ताफ अहमद, भाजपा नेता राजेश ताम्रकार, रोमनाथ साहू समेत लोगों की भीड़ घटना स्थल पर जम गई थी। उक्त प्रवेश द्वार सांसद निधि से निर्माणाधीन है। निर्माण के चलते कई दिनों से उक्त मार्ग आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। बताते हैं कि सांसद निधि से बन रहे प्रवेश द्वार का ठेका किसी पेशेवर के बजाए इलेक्ट्रिक दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति को दी गई है, जिसमें नगर निगम की भी संलिप्तता है। हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि सांसद निधि से होने वाले निर्माण कार्य का ठेका नगर निगम द्वारा कैसे दिया गया?

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