कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को भरोसा है कि कैश ट्रांसफर (सब्सिडी
के लाभार्थियों को सीधे नकद हस्तांतरण) योजना को लागू करने से कांग्रेस न
सिर्फ 2014 बल्कि 2019 का आम चुनाव भी जीत सकती है।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इसे गेम चेंजर यानी सब्सिडी देने के
तरीके में आमूल परिवर्तन की योजना बताया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला
दीक्षित ने ‘अन्नश्री’ नाम से इस योजना की शुरुआत कर दी है। इसके तहत
राजधानी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छह लाख परिवारों के बैंक खातों
में हर महीने छह सौ रुपए ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।
सीधे नकद सहायता पहुंचाना चुनावी लाभ के लिहाज से अक्सर अधिक कारगर
रहा है। इसलिए कांग्रेस नेताओं की यह उम्मीद निराधार नहीं है कि आधार कार्ड
के जरिये खोले गए बैंक खातों में नकद सब्सिडी पहुंचाने की योजना सफल हो
गई, तो यह चुनावी कामयाबी का फॉमरूला भी हो सकता है। लेकिन सबसे बड़ी
चुनौती यही है कि ये योजना सफल हो।
राजस्थान के कोटकासिम और झारखंड के रामगढ़ जिले में इस संबंध में चलाए
गए पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे उत्साहवर्धक नहीं रहे हैं। उन दोनों जगहों से
मिले संदेशों को ठीक से समझा जाए तो यही निष्कर्ष निकलता है कि कैश
ट्रांसफर योजना को लागू करने की राह में अनेक तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें
हैं। जिन बिजनेस कॉरेसपॉन्डेंट्स के माध्यम से इस योजना को सफल बनाने की
आशा की गई है, खुद उनके प्रशिक्षण का स्तर एवं उनकी कार्य स्थितियों से
संबंधित गंभीर समस्याएं मौजूद हैं।
ऐसे में एक जनवरी से 51 जिलों में और 2013 के अंत तक सारे देश में कैश
ट्रांसफर योजना लागू करना एक अतिमहत्वाकांक्षी इरादा लगता है। बहरहाल, यह
अच्छी बात है कि दिल्ली में ‘अन्नश्री’ योजना सब्सिडी आधारित अन्य योजनाओं
की पूरक के रूप में लागू की गई है। यानी पहले से जारी योजनाएं फिलहाल बंद
नहीं होंगी। यह एक व्यावहारिक तरीका लगता है।
कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है कि यह योजना अभी प्रायोगिक दौर में है,
जिसके अनुभवों से काफी कुछ सीखने की जरूरत है। एक गंभीर योजना पर अमल में
उसी के अनुरूप गंभीरता बरतने की आवश्यकता होती है। वरना लेने के देने पड़
सकते हैं।
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