कोला के विभिन्न दुर्गुणों का परिचय तो हम देते आए हैं - इसमें ७ प्रकार के अम्ल ( अcइद्स्) होते हैं जो पेट तथा हड्डियों को दुर्बल करते हैं; इसमें चीनी की मात्रा भी अधिक होती है जो आपको एक आकर्षक 'हाई' देती है, और आपको लगता है कि आपमें स्फ़ूर्ति आ गई है, यह धोखे बाज 'हाई' है जो वास्तव में आपके शरीर के 'ग्लाइसैमिक सूचकांक' को गड़बड़ा देता है। और इसमें कैफ़ीन तो होता ही है इसलिये आप जब भी कुछ पीना चाह्ते हैं आपका मन 'कोला कोला हीबोलता है। मेरे मित्र की पत्नीने फ़ैशन में आकर यूएस ए में पानी के बदले कोला ही पीना शुरु कर दिया। कुछ ही वर्षों में उनकी हड्डियां चरमराने लगीं और उऩ्हें तरह तरह की बीमारियों ने घेर लिया। अब उनको , इतनी मार खाने के बाद अकल आई और उऩ्होंने कोला कोला का भजन बन्द कर दिया और उनके स्वास्थ्य में उन्नति हो रहीहै।
अब एक 'रैस्पिरोलाजी' के फ़रवरी अंक में प्रकाशित शोध के अनुसार कोला या किसी भी फ़िज़्ज़ी पेय की 'फ़िज़्ज़' या हवा एक तो मोटापा बढ़ाती है, और दूसरे, हृदयके रोग तो बढ़ाती ही है, किन्तु अब इसका गहरा सम्बन्ध दमे और साँस के रोग से सामने आया है। इतनी उपलब्धि के लिये आपको अधिक कोला या फ़िज़्ज़ी पेय नहीं पीना पड़ेगा. प्रति दिन मात्र आधा लिटर पीने से हो जाएगी। कोला कोला ज़िन्दाबाद नहीं, वरन, कोला कोला मुर्दाबाद गाना चाहिये ।
अब एक 'रैस्पिरोलाजी' के फ़रवरी अंक में प्रकाशित शोध के अनुसार कोला या किसी भी फ़िज़्ज़ी पेय की 'फ़िज़्ज़' या हवा एक तो मोटापा बढ़ाती है, और दूसरे, हृदयके रोग तो बढ़ाती ही है, किन्तु अब इसका गहरा सम्बन्ध दमे और साँस के रोग से सामने आया है। इतनी उपलब्धि के लिये आपको अधिक कोला या फ़िज़्ज़ी पेय नहीं पीना पड़ेगा. प्रति दिन मात्र आधा लिटर पीने से हो जाएगी। कोला कोला ज़िन्दाबाद नहीं, वरन, कोला कोला मुर्दाबाद गाना चाहिये ।
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