Total Pageviews

Wednesday, March 7, 2012

अच्छा स्पीकर ° अच्छा लिस्नर बनना जरूरी

 बोलते समय यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि आप कब, कहां, किनके बीच, क्या और क्यों बोल रहे हैं। अन्यथा आपकी बातों का कोई महत्व नहीं होगा। चेहरे पर मुस्कान के साथ, सही पॉश्चर में खड़े होकर, लोगों से आई कांटैक्ट बनाकर अगर आप बोलेंगे तो आपकी प्रस्तुति जरूर प्रभावी होगी।
प्रोफेशनल हो या पर्सनल लाइफ, हम रोज ढेर सारे चैलेंज का सामना करते हैं। इन्हें प्रभावी कम्यूनिकेशन से पूरा किया जा सकता है। दांपत्य जीवन, व्यापार, जॉब, संयुक्त या एकाकी परिवार हर जगह दिनचर्या के प्रारंभ के साथ ही कम्यूनिकेशन प्रारंभ हो जाता है। इसलिए इसका प्रभावी होना आवश्यक है।
सुनकर समझिए: व्यक्ति के बोलने की दर जहां 100 शब्द प्रति मिनट है, वहीं सुनने की दर 300 शब्द प्रति मिनट है। इसलिए अधिक ज्ञान अर्जित करना हो तो एक अच्छा श्रोता बनना भी जरूरी है। लोगों को देखकर और सुनकर उन्हें बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। अच्छा स्पीकर बनने के लिए भी अच्छा लिस्नर बनना बहुत जरूरी है।
डर के आगे जीत: ट्रेनिंग के पहले चरण में प्रतिभागियों को मंच पर आकर सबके सामने अपनी कमियों और खूबियों को बताते हुए परिचय देना था। उपस्थित लोग इस सेशन के दौरान घबराए। कुछ लोग तो बोलते-बोलते बात ही भूल गए, तो कुछ हड़बड़ी में गलतियां कर बैठे। कुछ लोग सामने आने से हिचकिचाते रहे। प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि मंच पर आकर बोलने के डर से उनके पैर कांप रहे थे और धड़कन तेज हो गई थी। ट्रेनर पुरुषोत्तम मिश्रा ने बताया कि यह सब मन के डर के कारण होता है। इसकी वजह से ही हम प्रस्तुति देने में पिछड़ जाते हैं। इस डर को हटाया जाए तो आगे जीत होगी।
ग्रुप कम्यूनिकेशन: प्रशिक्षण के दौरान ग्रुप एक्टिविटी से भी प्रतिभागियों की झिझक दूर की गई। उन्हें अलग-अलग वर्गो में बांटकर नृत्य नाटक आदि की प्रस्तुति देने को कहा गया। ग्रुप में यह काम काफी सहजता से हुआ। प्रशिक्षक ने बताया कि एक से अधिक लोगों के साथ कम्यूनिकेट करते समय परिस्थिति और संस्कृति को समझकर ही विचार रखने चाहिए, ताकि लोग आपकी बातों को समझ सकें। इसके बाद हुए फाइनल प्रेजेंटेशन में प्रत्येक प्रतिभागी ने पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ मंच पर अकेले आकर अपनी बात रखी। 

No comments:

Post a Comment

http://rktikariha.blogspot.com/