DURGWALA
अधूरे-पूरे सपनो का शहर
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Sunday, February 12, 2012
गर दीवाने ना हो,
हुस्न को कौन पूछे गर दीवाने ना हो,
साकी को कौन पूछे गर मैखाने ना हो,
शमा खुद झुक झुक के कबूल करती है देखो,
उसे कौन पूछे गर परवाने ना हो-
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