DURGWALA
अधूरे-पूरे सपनो का शहर
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Thursday, October 27, 2011
सरफरोशी की तमन्ना
खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद,
आशिकों का जमघट
आज कूंचे-ऐ-कातिल में है
।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
-
Ram Prasad Bismil
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