बापू आज आपका हैप्पी बड्डे है। इसलिए आज आपको नहला-धुलाकर कल के लिए तैयार किया जा रहा है। आप सोचते होंगे कि आपको देश के लोग कितना प्यार करते हैं, कितना सम्मान करते हैं, जो चौक-चौराहों पर आपको बिठाकर रखा है। बापू आपको गलत फहमी है। इन कमीनों ने आपको अपनी विचारधारा बेचने के लिए और नेतागिरी की दुकान चलाने के लिए होर्डिंग की तरह इस्तेमाल किया है। आप नेताओं के लिए मॉडल से ज्यादा कुछ नहीं हैं। सॉरी बापू आपको ये खरी-खरी खराब लग रही होगी, लेकिन क्या करूँ मजबूरी में आपको बता रहा हूं।
पिछले साल भी आपके बड्डे पर आपको नहलाने-धुलाने की ड्यूटी मुझे मिली थी। इस बार भी मुझे ही जबरन ये ड्यूटी थमाई गई है। मेरी पिछले साल भी इच्छा नहीं थी और इस बार भी वही हालत है। नवरात्र का उपवास मेरी हालत खराब कर रहा है और मुझे आपको ऊमस भरी दोपहरी में नहलाना पड़ रहा है। मजबूरी है नौकरी का सवाल है। वैसे बापू मैं आपकी दिल से इज्जत करता हूं, इसलिए मजबूरी में ही सही मैं आपकी साफ-सफाई पूरी ईमानदारी से करता हूं। याद है आपको पिछले साल जब मैं आपको नहलाने आया था, तो आपका चश्मा गायब था। मैंने जब चश्मा चोरी होने की बात साहब लोगों को बताई तो उन्होंने मुझे कितना डांटा था। बड़ी मुश्किल से आपकी पसंद का मॉडल ढूंढ-ढांढकर लाया गया था और जितनी परेशानी चश्मा ढूंढने में साहब लोगों को हुई थी, उतनी ही ज्यादा गालियां मुझे खानी पड़ी थी और साथ में चेतावनी भी मिली थी। वो तो अच्छा हुआ सारे अख़बार वाले और न्यूज चैनल वाले हमेशा की तरह सो रहे थे और उन्हें इस बात का पता नहीं चला, वरना मेरा सस्पेंशन पक्का था।
खैर छोड़ों पुरानी बातें बापू कोई मतलब नहीं इनका। आपको तो पता भी नहीं कि जो चश्मा आपको पहनाया गया उसके शीशों पर दुनिया भर के स्क्रैच लगे हुए थे। कबाड़ खाने में पड़ा हुआ था वो। और आपको पता चलता भी तो क्या फायदा होता। क्या आप अच्छे और साफ-सुथरे शीशों वाले चश्मे से वो सब देख पाते जो आज देश में हो रहा है। देश के अधिकांश शहरों में सड़कों पर खून बिखरा हुआ है। क्या आप वो देख पाते।
अच्छा, तो ये बात है। मुझे अब समझ में आ रहा है कि आप खराब शीशों की शिकायत क्यों नहीं करते। समझा, दरअसल आप वो सब देखना ही नहीं चाहते, जो देश में हो रहा है। इसकी तो आपने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी। जभी मैं सोचूं कि साला इत्ते सालों से आप खामोश कैसे बैठे हैं। इतने लफड़े-दफड़े, दंगे-फसाद देखकर भी आप उपवास करने क्यों नहीं गए। खैर, जाते भी तो भी आपको कोई जूस पिलाने तक नहीं आता और वैसे भी चौक-चौराहों पर बैठे-बैठे आप उपवास ही तो कर रहे हैं। अरे, ये तो मैंने सोचा ही नहीं। बापू मुझे माफ करना। आप तो अपनी पुरानी स्टाईल से ही काम कर रहे हैं। कमीनों की हरकतें देखकर आप लगता है इस दुनिया को छोड़ने के साथ ही उपवास करने के लिए आइडिया लगाकर चौक-चौराहों पर उपवास पर बैठ गए थे।
बापू, आपकी सहनशीलता तो मानना ही पड़ेगा। देश को आज़ाद करा दिया, मगर साले देशवासियों ने आपको चौक-चौराहों पर जंजीरों के घेरों से कैद कर दिया है। आपको शो-पीस बना दिया। आपको देखने-दिखाने की चीज बना दिया। आपको विचारधारा बेचने का विज्ञापन बना दिया। आपको नेतागिरी की मार्केटिंग का मॉडल बना दिया। आपको जुलूस और धरना देखने वाला दर्शक बना दिया। आपको होर्डिंग की तरह लटका दिया है इन कमीनों ने। और आप हैं बापू खामोशी से सब सह रहे हैं। हमारे शहर में विपक्ष के जितने धांसू नेता हैं सबके-सब एसी कार में चलते हैं। पैदल चलने का तो उनको मौका ही नहीं मिलता। कभी-कभार रैली, जुलूस में एकाध घंटा पैदल चल लेते हैं तो दूसरे दिन ही बयान जारी कर देते हैं कि शहर को धूल और धुएं से बचाना होगा। प्रदूषण से जीना दूभर हो गया है शहर वासियों का। बताओ कितने एहसान फरामोश हैं ये लोग। साले कार में घूमते हैं और धूल-धुएं की बात करते हैं। जो वोट देते हैं उस जनता की चिंता करते हैं और जिसने वोट देने का अधिकार दिलाने के लिए आज़ादी दिलाई, उसकी रत्ती भर फिकर नहीं। धूल फांकते बैठे हो आप चौक-चौराहों पर। साल में एक बार साफ कराते हैं साले। आप भी बापू धन्य हैं। सालों से धूल-धुआं खा रहे हो और खामोश बैठे हो। आपकी जगह कोई और होता तो दमा-अस्थमा का शिकार होकर खांस-खांसकर मर जाता साला। लेकिन आपका अपने बच्चों के प्रति प्यार मानने लायक है। भगवान शंकर के बाद एक आप ही नज़र आते हो, जो विष पीकर भी कल्याण की सोच रहे हो।
इसके बाद भी बापू, कमीनों को ज़रा भी शर्म नहीं आती। अब आपको क्या बताऊं। मेन चौक-चौराहों पर तो आपकी हालत ठीक है लेकिन सुनसान इलाकों और बगीचों में आपकी पोजिशन बहुत ज्यादा खराब है। आपको साफ करते समय पक्षियों की बीट की दुर्गंध से ऐसा लगता है कि उल्टी हो जाएगी। पता नहीं आप क्यों सबको माफ किए जा रहे हो। कमीने अपने लिए नया-नया दफ्तर बनवा लेते हैं, लेकिन आपके सर पर एक छोटा सा शेड नहीं बनवाते। उसमें कुछ बचेगा नहीं न। क्यों बनवाएंगे फिर। मोटी कमाई का प्लान बने तो आपको कहीं पर भी बिठाकर करोड़ों रूपया जीम जाएंगे, लेकिन पुरानी जगह जहां आप सालों से बैठे हो
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