7 सितम्बर 2011 को Delhi High Court के प्रवेश द्वारा क्रमांक 5 पर जो कायराना विस्फोट हुआ वह मानवता पर एक कला धब्बा है. इसकी जितनी निंदा की जावे कम है. देश केलिए कल का दिन एक दुर्भग्य पूर्ण दिन था.
केंद्र की सत्ता में बैठे लोगों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की राजनैतिक इक्छाशकती की कमी है अथवा हम कह सकते है की उनमे इसकेलिए राजनैतिक इक्छाशकती है ही नहीं. उनका एकमात्र उद्दयेश येनकेन प्रकरण सत्ता में बने रहना है.
ये लोग जिस राजनैतिक इक्छाशकती से रामदेव बाबा द्वारा (देश के लोगों द्वारा अर्जित काले धन जोकि) विदिशी बैंकों में जमा देश के काले धन को वापस देश में लाने की मुहीम को कुचलने का काम किया है उसकी तुलना में वे वोट की राजनीती के कारण ये सत्ता भोगी लोग आतंकवाद के खिलाफ पूर्ण राजनैतिक इक्छाशकती के साथ नहीं लड़ रहे है.
ये सत्ता भोगी लोग गंघिवादी समाजसेवक श्री अन्ना हजारे के भ्रष्ट्राचार विरोधी ""जनलोकपल"" मसौदे के आन्दोलन को पूर्ण राजनैतिक इक्छाशकती के साथ कुचलने का प्रयास करते रहे.
ये लोग अपनी सम्पूर्ण राजनैतिक इक्छाशकती को येनकेन प्रकरण सत्ता में बने रहने में लगाराहे है ,
आपलोगों को याद होगा की येलोग रामदेव बाबा व टीम अन्ना के आन्दोलन को कुचलने / दबाव पूर्वक रोकने के लिए सम्पूर्ण राजनैतिक प्रयास किये , जबकि ये आन्दोलन देश व समाज के बेहतर भविष्य के लिए था .
सरकार ने उपरोक्त दोनों आन्दोलन , 2- G घोटाला , C W G घोटाला एवं महंगाई के विरोध को दबाने में जो अपना दमखम लगाया उसकी तुलना हम कल की दुर्भाग्य पूर्ण घटना को रोकारे के प्रयास व घटना के बाद की कार्यवाही को देख कर सकतें है. इस दुर्भाग्य पूर्ण घटना का सत्ताधीशोंने राजनैतिक लाभ लेने को कोशिश की है.
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