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Saturday, August 20, 2011

anna nahi, ye aandhi hai

अन्ना को नहीं.. , 
                      
   उस  भारतीय मनीषा को को सलाम कीजिये, जो आपने गावं  की माटी ओंर इस  देश  के आम   आदमी में परमात्मा के  दर्शन करता है.

आज़ादी के छह दशक बाद..
                     ...जब वन्दे मातरम , इन्कलाब जिंदाबाद & भारत माता की जय का नारा लगाते नवजवान दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पुरे देश के हर शहर में दिखने लगे तो आप यकीन मानिये इस देश का जज्बा अभी मारा नहीं . इन्हें फसबुकिया या ट्विटर गिरोह मत कहिये , इसे मजाक मत समझिये. .

                             ..क्योकि संवाद का जरिया बदल सकता है,
 पर भरोसेमंद अगुआ के बीना लोगो के सड़क पर उतरना आसन नहीं .


अन्ना  यदि गाँधी  & विवेकानद को नहीं समझते,
तो तय मानिये ...
 वे देश की जनता को भी अपनी बात समझा नहीं पते 
 



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