दुश्मनी मेरी इससे कोई जाती नहीं है
लेकिन फ़ेसबुक की दुनिया मुझे भाती नहीं है
लेकिन फ़ेसबुक की दुनिया मुझे भाती नहीं है
दीवार पे लिखो, दीवार पे बाँचो
यूँ दीवारों से बातें की जाती नहीं है
यूँ दीवारों से बातें की जाती नहीं है
एक नहीं, दो सौ नौ फ़्रेंड्स हैं मेरे
कहने को दोस्त, लेकिन कोई साथी नहीं है
कहने को दोस्त, लेकिन कोई साथी नहीं है
विडियो और फोटो में कुछ ऐसा फ़ंसा
कि शब्दों की सही वर्तनी अब आती नहीं है
कि शब्दों की सही वर्तनी अब आती नहीं है
फ़ेसबुक की दुनिया एक सूखे पेड़ सी है यारो
जिसमें शाख ही शाख है कोई पाती नहीं है
जिसमें शाख ही शाख है कोई पाती नहीं है
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मंगल पांडे......................... ..
महान क्रांतिकारी उन्हीं सैनिकों में से एक थे जिन्होंने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ भारी असंतोष के माहौल में 27 मार्च 1857 को एक अफ़सर पर गोली चला दी और अपने साथियों से विद्रोह की अपील की थी । बैरकपुर में मंगल पांडे और उनके साथी ईसुरी पांडे को फाँसी पर लटकाए जाने के लगभग एक महीने बाद 10 मई 1857 को मेरठ छावनी में बग़ावत हो गई ।
इस विद्रोह में मेरठ के आम लोगों यानी कारीगरों, दुकानदारों और मज़दूरों की अहम भूमिका रही । मेरठ में कई अँगरेज़ अफ़सरों और उनके परिवार वालों को मारने के बाद विद्रोहियों ने उनके घरों को आग के हवाले कर दिया और रातों रात घोड़ों पर सवार होकर वो दिल्ली के लालक़िले की ओर कूच कर गए । इस प्रकार 1857 की क्रांति का आगाज मंगल पांडे ओर उनके महान साथियो ने किया ।
**19 जुलाई 1827 को जन्मे महान क्रांतिकारी मंगल पांडे के जन्म दिवस पर उन्हे शत-शत नमन......**
आज देश को एसे ही महान क्रांतिकारी की जरूरत है.... जय हिन्द
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