मेरे इंतज़ार की राहत हों तुम ..
मेरे दिल की चाहत हों तुम
तुम हों तो ये दुनिया है ..
मैं केसे कहू मेरे लिए क्या हों तुम
चलो मैं तुम्हे बताऊ क्या हों तुम
छू कर जो गुज़र जाए वो हवा हों तुम
मैंने जो मांगी थी वो दुआ हों तुम
करे मुझ को रोशन वो दिया हों तुम
फिजा में महकती एक शाम हों तुम
प्यार में छलकता जाम हों तुम
मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हों तुम
बुझती ज़िन्दगी की सांस हों तुम
फिर कैसे न कहू "रस्क" मेरी जान हों तुम
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दिल में गर यकीं हो तो नाकामी नहीं मिलती ,
यु ही किसी को मंजिल नहीं मिलती !
जो लोग इरादों के साथ इरादे बदल देते है ,
उनको चाह कर भी मंजिल नहीं मिलती !
जब भी देखो कुछ और ही गुमान होता है ,
हँसते हुए चेहरे पर ख़ुशी नहीं मिलती !
जब भी निकलो घर से यकीं से साथ ,
रस्ते में ढूढने की फुर्सत नहीं मिलती !!
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रोज आ जाया करो, लोट के घर शाम के बाद,
मेरे दिल की चाहत हों तुम
तुम हों तो ये दुनिया है ..
मैं केसे कहू मेरे लिए क्या हों तुम
चलो मैं तुम्हे बताऊ क्या हों तुम
छू कर जो गुज़र जाए वो हवा हों तुम
मैंने जो मांगी थी वो दुआ हों तुम
करे मुझ को रोशन वो दिया हों तुम
फिजा में महकती एक शाम हों तुम
प्यार में छलकता जाम हों तुम
मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हों तुम
बुझती ज़िन्दगी की सांस हों तुम
फिर कैसे न कहू "रस्क" मेरी जान हों तुम
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दिल में गर यकीं हो तो नाकामी नहीं मिलती ,
यु ही किसी को मंजिल नहीं मिलती !
जो लोग इरादों के साथ इरादे बदल देते है ,
उनको चाह कर भी मंजिल नहीं मिलती !
जब भी देखो कुछ और ही गुमान होता है ,
हँसते हुए चेहरे पर ख़ुशी नहीं मिलती !
जब भी निकलो घर से यकीं से साथ ,
रस्ते में ढूढने की फुर्सत नहीं मिलती !!
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रोज आ जाया करो, लोट के घर शाम के बाद,
राह तकती है तुम्हारी , ये नज़रे शाम के बाद !
वस्ल की रात नसीबो से मिला करती है ,
सबको मिलते नहीं चाहत के समर के शाम बाद !
ये करिश्मा है मुहब्बत का , कोई खेल नहीं
कैद हो जाते है फूलो में भँवरे शाम के बाद !
चांदनी नाच रही हो ये गुमा होता था ,
जब भी मचली कोई लहर दरिया की शाम के बाद !
घेर लेते है उदासी के परिंदे उसको ,
तनहा बैठा जो कोई दोस्त अगर शाम के बाद !
दिन ढले वस्ल का क्या कर लिया वादा उसने,
नीद आई नहीं फिर सारी उम्र शाम के बाद !
याद बदलियों की तरह आँखों में उतर आती रही है ,
रोज कर देती है दमन तर मेरा शाम होने के बाद !!
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मौन हू मै..........................
मौन हू मै
क्यू कि अब कुछ कह नही सकता
क्या कहू कब तक कहू
इससे ज्यादा मै मै कुछ कर नही सकता
मांगता क्या मै खुदा से तुमको
मैंने माँगा था तुम्ही से तुमको
तुम थी भी और नही भी
तुम हो भी और नही भी
तो फिर क्या कहू ...?
किससे कहू ...?
इसलिए मौन हू मै ...
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इंतज़ार........................ ......................
अगर वक्त हो तुम्हारे पास
तो कभी हमें भी देख लेना
कि तेरी आंखों की सरसराहट भी
है मुझे कुछ कह जाती
है कई दिन बीते कई
कि तुझसे कोई बात नहीं हुई
कि इक नज़र देख लेते तुम मुझे
मेरे दिल को धड़कने का बहाना मिल जाता।।
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उन की आंखों से जख्मों से,
जो भर दे वो अक्सीर कहां?
मेरे लावारिस अश्कों को,
जो थामे वो मनमीत कहां?
मेरे अंधियारे आंगन में,
जो दीया जले तकदीर कहां ?
मेरे तन्हा से आलम में,
जो रंग भरे वो यार कहां?
आहें भर भर के हार गये,
अब उनमें भी तासीर कहां?
जब नायक ही खलनायक हों
तब मिलता है इंसाफ़ कहां?
ख्वाबों के महल सब टूट गये,
बेजान हुए अब जीएं कहां?
आंखों से अश्क हुए ओझल,
पर दर्दे जिगर थमता है कहां?
अब उनमें भी तासीर कहां?
जब नायक ही खलनायक हों
तब मिलता है इंसाफ़ कहां?
ख्वाबों के महल सब टूट गये,
बेजान हुए अब जीएं कहां?
आंखों से अश्क हुए ओझल,
पर दर्दे जिगर थमता है कहां?
ये दुनिया जंगल पत्थर की,
खिलना मुरझाना जाने कहां?
शीशे का समझ कर जामे जिगर,
यूं मय को पीया और बहक गया,
हम टुकड़े टुकड़े चुनते रहे,
जो टूट गया सो टूट गया
गीत मिले ना साज रहे,
हो मुग्ध मधुर संगीत कहां?
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हमें मालूम न था कि हम इतने बैगेरत निकलेंगे
की ठुकराये जायेंगे हम महोब्बत के लिए कई बार
फिर भी हर बार उसी दर से
महोब्बत की गुजारिश करेंगे।
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अख्तियार हम पर उनका इस कदर है कि
वो हमें चाहे न चाहे पर
हमारे दिल में उनके लिए चाहत
का एक सैलाब उमडता रहता है।।
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जी चाहता है तुमसे प्यारी सी बात हो
खिलना मुरझाना जाने कहां?
शीशे का समझ कर जामे जिगर,
यूं मय को पीया और बहक गया,
हम टुकड़े टुकड़े चुनते रहे,
जो टूट गया सो टूट गया
गीत मिले ना साज रहे,
हो मुग्ध मधुर संगीत कहां?
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हमें मालूम न था कि हम इतने बैगेरत निकलेंगे
की ठुकराये जायेंगे हम महोब्बत के लिए कई बार
फिर भी हर बार उसी दर से
महोब्बत की गुजारिश करेंगे।
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अख्तियार हम पर उनका इस कदर है कि
वो हमें चाहे न चाहे पर
हमारे दिल में उनके लिए चाहत
का एक सैलाब उमडता रहता है।।
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जी चाहता है तुमसे प्यारी सी बात हो
जी चाहता है तुमसे प्यारी सी बात हो ।
खामोश तारे और लम्बी सी रात हो ।
फिर सारी रात तुमसे हम कहते रहें ।
कि तुम मेरी जिन्दगी तुम मेरी काएनात हो ।
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