मुंबई में हमला क्या हुआ, कि नेताओं को बिजनेस मिल गया। सबके सब ऊटपटांग बयान देने लगे। लेकिन क्या आप जानते हैं, यह सब बयान बेवजह नहीं हैं। अन्ना के आंदोलन से ध्यान हटाने के लिए ही राहुल, दिगविजय एक प्रोपगेंडा रच रहे हैं। ताकि लोगों की निगेटिव एनर्जी सरकार की बजाए इन दो लोगों के इर्दगिर्द घूमने लगे। बस किस्सा क्या है, सियासत तो कोई इन कांग्रेसियों से सीखे। कितनी गिरे कितनी उठे। सब कुछ एकदम मख्खन की तरह करते हैं। बयानों पर ध्यान न दीजिए, सीधा फोकस रखिए, कि अन्ना का भ्रष्टाचार वाला मामला कम न पड़े।
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