दुर्ग/.

बाबा रामदेव के नाम लिखे दो पत्रों में उसने पूंजीवादियों को भूमि का व्यवस्थापन करने और भूमिहीनों की हालत पर निराशा जताई है। उसने अपनी आप-बीती बताते हुए लिखा है कि जमीन नहीं होने के कारण उसे दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ा। अब उसके पास सिर्फ आत्महत्या ही विकल्प बचा है।
सुखूराम के पुत्र तेजप्रताप ने बताया कि पिता पिछले छह माह से बाबा रामदेव के अभियान से जुड़े थे। दुर्ग से 65 किलोमीटर दूर ग्राम तेलगा (बेरला ब्लाक) से सत्याग्रह में शामिल होने शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे अपने गांव से निकले थे। रविवार को सुबह साढ़े नौ बजे सत्याग्रह स्थल में उनकी हालत खराब होने की जानकारी मोबाइल पर मिली और यहां पहुंचने पर उनकी मौत हो चुकी थी।
इधर भारत स्वाभिमान न्यास के जिला संगठन मंत्री सुशील पांडेय ने बताया कि मृतक का नाम संगठन के रजिस्टर में दर्ज नहीं है। उनके बारे में कोई जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। सत्याग्रह स्थल पर उनको रविवार की सुबह से देखा गया।
उनकी हाल बिगड़ने पर जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम करने वाले जिला अस्पताल के डाक्टर नरेंद्र वाजपेयी ने बताया कि मृतक ने इंसेक्टिसाइड का सेवन किया था। इसके असर से धीरे-धीरे हार्ट काम करना बंद कर देता है।
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