............ फैसला है या युद्ध ! झगडा-झंझट तब हुआ है, जब राज्य सरकार व केंद्र सरकार की मशीनरी दंगाइयों के साथ कंधे से कंधा मिला रहे थे। बाबरी मस्जिद के ध्वंस के पश्चात बहुत सारे अधिकारी- कर्मचारी दंगाइयों से हाथ मिला रहे थे। कुछ ऐसी ही स्तिथि पैदा करने की कोशिश की जा रही है ..............और आगे पैकेज नही, जीने की आजादी चाहिए यह पहला मौका नही है जब आवाम सरकार के खिलाफ सडकों पर उतरी हो, बल्कि इसके पहले भी काश्मीरी आवाम ने कई बार अपने अपमान के खिलाफ सडकों पर उतर कर अपना जबरजस्त विरोध जाहिर किया है । वह समय चाहे सेना के जवानों द्वारा मेडल के लिए किए गये फर्जी इनकाउंटरों मे मारे गये लोंगों के जनाजे मे शामिल लोंगों की भीड हो या फिर भरे चैराहे पर तलाशी के नाम पर आम आवाम को खुले आम अपमानित करना हो, हर बार आवाम के असंतोष का लावा सरकार और सैन्य ज्यादतियों के खिलाफ कई बार मुखर हुआ है।.....और आगे अयोध्या मसले में साजिश है, फैसला टालना रमेश चन्द्र त्रिपाठी की याचिका उच्च न्यायालय द्वारा खारिज करते समय अदालत ने उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना आयद किया था और उसी समय यह बात भी प्रकाश में अदालत के सामने लायी गयी थी कि वर्ष 2005 में किसी अन्य मुकदमे में किसी अदालत के सामने स्वयं रमेश चन्द्र त्रिपाठी द्वारा यह कहा गया था कि उनका मानसिक संतुलन ठीक नही है।अब प्रश्न यह है कि ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे महत्व पूर्ण वाद में अंतिम समय में हस्तक्षेप को क्यों संज्ञान मे लिया जा रहा है? ..और आगे मेरठ भी है डरा डरा सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राम जन्म भूमि/ बाबरी मस्जिद विवाद पर आने वाला फैसला भले ही एक सप्ताह के लिए टल गया है, लेकिन लोगों के दिलों में उथल पुथल जारी है. ऐसे मौके पर साम्प्रदायिक दंगों के लिए कुख्यात मेरठ के लोगों के दिलों का जायजा लेता हुया वरिष्ठ पत्रकार सलीम अख्तर सिद्दीकी का २३ सितम्बर की सुबह लिखा गया आलेख..और आगे गरीब जनता का मज़ाक है हवाई दौरा सरकार बाढ़ की लीला और जन -त्रासदी को हवाई जाहज के बहाने हवा में तैरकर ऊपर से देखकर ही दुखी हो रही है। सोनिया जी देख आई हैं, मायावती जी ने भी देख लिया है। मुझे नहीं मालूम कैसा लगता होगा हवाई जाहज में बैठकर जनता की चीखों के खुले मुंह को देखना? हवाई जाहज में बैठा नेता अंदर की ठंडक के बीच जमीन की गर्मी का एहसास शायद ही कर पाता होगा? इसे आप नेता या सरकार का दोष न मानें दरअसल यह व्यवहार तो उन्हें सामंती विरासत के आधार पर ही मिला है और आगे |
बहुत वर्षों बाद केंद्र सरकार के नेता कश्मीर समस्या के बारे में शुतुरमुर्गी नीति से बाहर निकल पाए हैं . उम्मीद की जानी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर की दो दिन की यात्रा पर गया सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर की समस्या को सही परिप्रेक्ष्य में रखने में मील का पत्थर साबित होगा..यह अलग बात है कि बी जे पी ने इस अवसर पर भी राजनीति खेलने की कोशिश की लेकिन आज पूरे देश में कश्मीर समस्या का हल खोजने का माहौल बन चुका है . लगभग सभी चाहते हैं कि कश्मीर समस्या में पाकिस्तान की दखलंदाजी ख़त्म हो. देश में जागरूक जनमत को मालूम है कि कश्मीर समस्या को पैदा करने में सबसे ज्यादा योगदान बी जे पी का ही है..... और आगे
आज हजारों लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है, या जन्म लेते ही लावारिस छोड़ दिया जाता है. आज भी समाज में कई घर ऐसे हैं जहां बेटियों को बेटे के मुकाबले अच्छा खाना और अच्छी पढ़ाई नहीं दी जा रही हैं. भारत में 20 से 24 साल की शादीशुदा औरतों में से 44.5% (करीब आधी) औरतें ऐसी हैं जिनकी शादियां 18 साल के पहले हुईं हैं. इन 20 से 24 साल की शादीशुदा औरतों में से 22% (करीब एक चौथाई) औरतें ऐसी हैं जो 18 साल के पहले मां बनीं हैं. इन कम उम्र की लड़कियों से 73% (सबसे ज्यादा) बच्चे पैदा हुए हैं. फिलहाल इन बच्चों में 67% (आधे से बहुत ज्यादा) कुपोषण के शिकार हैं. और आगे
आप किसी एक क्या अनेक कहानीकारों और साहित्यकारों का उदाहरण दे सकते हैं जिन्हों ने भारत के बारे में बहुत कुछ बड़ा अपमानजनक लिखा है. ऐसे ही लोग पैदा करने केलिए मैकाले जैसों ने मेहनत की थी जो आपने आप को, अपनी जननी, अपनी मातृभूमी, अपनी परम्पराओं को गाली देने में प्रसन्न हों. अडिगा ने भारत के बारे में कितनी झूठी गंदगी अपने उपन्यास ‘व्हाईट टाईगर’ में फैलाई है, उसे बुकर पुरस्कार मिल गया. ये भारत को कमजोर बनाने के प्रयास और षड्यंत्र ही तो हैं.
इसका एक प्रमाण देखिये , ## जेम्स मिल को भारतीय इतिहास का अधिकृत विद्वान मानागया है. शायद दस खण्डों में उसने भारत का इतिहास अनेक वर्षो की मेहनत से लिखा. किस नीयत से लिखा, ज़रा इसकी बानगी देखिये............
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और भी बहुत कुछ
इसका एक प्रमाण देखिये , ## जेम्स मिल को भारतीय इतिहास का अधिकृत विद्वान मानागया है. शायद दस खण्डों में उसने भारत का इतिहास अनेक वर्षो की मेहनत से लिखा. किस नीयत से लिखा, ज़रा इसकी बानगी देखिये............
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अमलेन्दु उपाध्याय
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