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न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की। दोनों न्यायमूर्तियों में मतभेद था। एक
न्यायमूर्ति याचिका खारिज करने के पक्ष में थे जबकि दूसरे इसके खिलाफ थे।
इसलिए सर्वोच्च न्यायालय की परम्परा का पालन करते हुए उच्च न्यायालय को
फैसला सुनाने से रोकने का निर्णय लिया गया।"
उन्होंने कहा, "अब इस
मामले की अगली सुनवाई 28 सितम्बर को होगी। अदालत को इस बात की जानकारी है
कि लखनऊ खंडपीठ के एक न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसलिए मामले
पर 28 तारीख को सुनवाई होगी। सभी पक्षों को नोटिस जारी किया गया है और
अटार्नी जनरल को भी इस दिन अदालत में उपस्थित रहने को कहा गया है।"
उन्होंने
कहा, "अदालत को ऐसा लगा कि सर्वोच्च न्यायालय के कहने पर इस मामले के
सम्बंधित पक्ष शायद बातचीत के जरिए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का
प्रयास करें।"
ज्ञात हो कि सेवानिवृत्त नौकरशाह रमेश चंद्र
त्रिपाठी ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
याचिका में अयोध्या विवाद पर फैसला टालने और इस जटिल मामले का अदालत से
बाहर शांतिपूर्ण समाधान निकालने की संभावना तलाशने के लिए संबंधित पक्षों
को निर्देश देने की अपील की गई थी।
याचिका में कम से कम तीन से 14 अक्टूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों तक इस फैसले को टालने की भी अपील की गई थी।
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