बड़े लोगों की बात बड़ी होती है लेकिन कई बार ये बातें पता नहीं नहीं चलती. मसलन कार्ल मार्क्स आखिरी दिनों में ग़रीब थे लेकिन किसी को नहीं पता कि उन्होंने अपनी थोड़ी सी दौलत सबसे छोटी बेटी एलेनॉर को ही क्यों दी.
वैसे मार्क्स के सात बच्चे थे लेकिन उन्होंने एलेनॉर के नाम 250 पाउंड किए जिसकी आज क़ीमत 23000 पाउंड होगी. असल में अब इन रहस्यों पर से पर्दा उठ सकेगा क्योंकि कई प्रसिद्ध लोगों की वसीयतों को पहली बार ऑनलाइन किया जा रहा है. इस काम में यानी वसीयतों को डिजीटल रुप देने में डेढ़ साल का समय लगा और इसमें 20 अरब डॉलर की राशि के बारे में जानकारी मिली है.
एक और बानगी देखिए..रिकार्डों के अनुसार किसी ज़माने में धनी रहे ध्रुवीय खोजी सर अर्नेस्ट शैकल्टन की जब मौत हुई तो उनके पास भी बहुत कम पैसे थे. चार्ल्स डार्विन ग़रीबी में नहीं मरे. उनकी वसीयत में क़रीब 13 मिलियन पाउंड का ज़िक्र था और लेखक चार्ल्स डिकन्स की वसीयत सात मिलियन पाउंड की थी.
प्रोबेट कैंलेंडर बुक्स फॉर इंग्लैंड एंड वेल्स ने कई नामचीन हस्तियों की वसीयतों को ऑनलाइन किया है. असल में इन हस्तियों के परिवारों में झगड़ों और कई दावेदारों के कारण कई बार लाखों का हिसाब ही नहीं मिल पाता है. इन ऑनलाइन रिकार्डों के ज़रिए अब लोगों को सच्चाई का पता लग सकेगा. नेशनल आर्काइव्स के फैमिली हिस्ट्री विशेषज्ञ ऑड्रे कोलिंस कहते हैं कि वसीयतों से परिवार के इतिहास के बारे में जानने में बहुत जानकारी मिलती है.
वो कहते हैं, ‘‘ मामला पैसे का होता है इसलिए सभी नाम इसमें दिखते हैं. विधवा, अलग हुए बच्चे, पुराने संबंध बहुत कुछ मिलता है यहां जिसकी आम तौर पर कई जानकारी नहीं होती.’’ नेशनल आर्काइव्स ने 2004 में 1384 से लेकर 1858 के बीच लिखी गई दस लाख वसीयतों को ऑनलाइन किया था जिसमें शेक्सपीयर की वसीयत भी थी. अभी जारी की गई वसीयतों में 1858 के बाद की वसीयतें हैं.
वैसे मार्क्स के सात बच्चे थे लेकिन उन्होंने एलेनॉर के नाम 250 पाउंड किए जिसकी आज क़ीमत 23000 पाउंड होगी. असल में अब इन रहस्यों पर से पर्दा उठ सकेगा क्योंकि कई प्रसिद्ध लोगों की वसीयतों को पहली बार ऑनलाइन किया जा रहा है. इस काम में यानी वसीयतों को डिजीटल रुप देने में डेढ़ साल का समय लगा और इसमें 20 अरब डॉलर की राशि के बारे में जानकारी मिली है.
एक और बानगी देखिए..रिकार्डों के अनुसार किसी ज़माने में धनी रहे ध्रुवीय खोजी सर अर्नेस्ट शैकल्टन की जब मौत हुई तो उनके पास भी बहुत कम पैसे थे. चार्ल्स डार्विन ग़रीबी में नहीं मरे. उनकी वसीयत में क़रीब 13 मिलियन पाउंड का ज़िक्र था और लेखक चार्ल्स डिकन्स की वसीयत सात मिलियन पाउंड की थी.
प्रोबेट कैंलेंडर बुक्स फॉर इंग्लैंड एंड वेल्स ने कई नामचीन हस्तियों की वसीयतों को ऑनलाइन किया है. असल में इन हस्तियों के परिवारों में झगड़ों और कई दावेदारों के कारण कई बार लाखों का हिसाब ही नहीं मिल पाता है. इन ऑनलाइन रिकार्डों के ज़रिए अब लोगों को सच्चाई का पता लग सकेगा. नेशनल आर्काइव्स के फैमिली हिस्ट्री विशेषज्ञ ऑड्रे कोलिंस कहते हैं कि वसीयतों से परिवार के इतिहास के बारे में जानने में बहुत जानकारी मिलती है.
वो कहते हैं, ‘‘ मामला पैसे का होता है इसलिए सभी नाम इसमें दिखते हैं. विधवा, अलग हुए बच्चे, पुराने संबंध बहुत कुछ मिलता है यहां जिसकी आम तौर पर कई जानकारी नहीं होती.’’ नेशनल आर्काइव्स ने 2004 में 1384 से लेकर 1858 के बीच लिखी गई दस लाख वसीयतों को ऑनलाइन किया था जिसमें शेक्सपीयर की वसीयत भी थी. अभी जारी की गई वसीयतों में 1858 के बाद की वसीयतें हैं.
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