अगर ऐसा वाकया आपको देखने को मिले जहाँ कोई अपनी माँ को माँ कहने में शर्म महसुस करता हो और पुछने पर कहता हो ये बताने के लिए कि ये माँ है,माँ कहना जरुरी नहीं है। जरा सोचिए कितनी शर्मसार करने वाली घटना है। मेरा ये कहना उनके लिए है जो की अपने आपको भारतीय कहते है और "वन्दे मातरम्" जैसे पवित्र शब्द जो की हमारा राष्ट्रिय गीत है, को गाने से इनकार करते है और कहते है कि ये इस्लाम विरोधी है। जिसकी खाते है, जह...ाँ रहते है, उसको समर्पित दो शब्द कहने की बारी आती है तो उसे धर्म विरोधी बताकर उसका गान करने से मना करना कितनी शर्म की बात है एक कहावत है "जिस थाली में खाना उसी में छेद करना" यहा फिट बैठती है। धरती माँ जिससे हमें जीवन मिलता है, जिससे पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी मिलती है, जिसकी लाज बचाने के लिए न पता कितनो नें अपने प्राण की आहूती दे दी उसको सम्मान देनें में जिसे शर्म आती है उसे सच कह रहा हूँ कहीं डुब मरना चाहिए।Total Pageviews
Friday, November 4, 2011
शर्म आती है
अगर ऐसा वाकया आपको देखने को मिले जहाँ कोई अपनी माँ को माँ कहने में शर्म महसुस करता हो और पुछने पर कहता हो ये बताने के लिए कि ये माँ है,माँ कहना जरुरी नहीं है। जरा सोचिए कितनी शर्मसार करने वाली घटना है। मेरा ये कहना उनके लिए है जो की अपने आपको भारतीय कहते है और "वन्दे मातरम्" जैसे पवित्र शब्द जो की हमारा राष्ट्रिय गीत है, को गाने से इनकार करते है और कहते है कि ये इस्लाम विरोधी है। जिसकी खाते है, जह...ाँ रहते है, उसको समर्पित दो शब्द कहने की बारी आती है तो उसे धर्म विरोधी बताकर उसका गान करने से मना करना कितनी शर्म की बात है एक कहावत है "जिस थाली में खाना उसी में छेद करना" यहा फिट बैठती है। धरती माँ जिससे हमें जीवन मिलता है, जिससे पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी मिलती है, जिसकी लाज बचाने के लिए न पता कितनो नें अपने प्राण की आहूती दे दी उसको सम्मान देनें में जिसे शर्म आती है उसे सच कह रहा हूँ कहीं डुब मरना चाहिए।
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