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Friday, September 9, 2011

"गधीयाशाह पीर"

अपने साथियों के संग बीरबल गाँव से दिल्ली कि ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने एक मारा गधा देखा जिससे बीरबल के दिमाग में एक बेगुन्हा साधू  को बचाने कि योजना उपजी | बीरबल ने साथियों कि मदद से गधे को जमींन में दफना कर "गधीयाशाह पीर" नाम दिया |
कुछ झूठी तिलस्मी कहानिया बनाई जैसे जब साहूकार ने पीर बाबा को पानी नहीं पिने दिया तो पीर साहब ने कुए का सारा पानी अपने लौटे में समेट लिया और साहू कार के छमा मांगने पर वापस कुए को भर दिया आदि  | बीरबल ने साथियों द्वारा  गधीया पीर कि तिलस्मी कहानियों व मन्नत पूरी होने का प्रचार कराया |
कुछ दिनों में लोगो कि भीड़ लगने लगी और मन्नत पूरी होने पर लोग चादर चढ़ाने लगे |
         कई दिनों बाद वहा माजर पर भीड़ लगती देख बीरबल बादशा अकबर को लेकर आए और उन्हें पीर शाहब कि महानता तथा तिलस्मो से परिचित करवाया | फिर अकबर ने पीर कि माजर पर सजदा किया मन्नत मांगी तथा कुए का पानी पिया और महल में छिड़कने देने का हुक्म दिया ! तभी बीरबल बोले आप को सउधाहरण समझाने के लिए जरुरी था कि में आपको यहाँ लाऊ और उस निरअपराधी सज्जन कि बेगुनाही साबित करू जिसे आपने चचा व लोगो कि बातो में आकार आ जीवन सजा दे दि |  वो जमीं साधू कि है आप बताइए सत्य को छुपा और तोड़ कर कब्र,मस्जिद झूठ कायम करना क्या धर्म होगा है | मेरे द्वारा बनाई वो एक गधे कि कब्र है, जिसे सारे लोग पीर साहब मान कर मन्नत मांग रहे है | तब अकबर को बात समझ  में आई और उसने साधू को उसकी जमीं वापस दे दि और चचा इस्लामुदीन को आ जीवन करावश कि सजा सुना दि तथा बीरबल को इनाम में गधिया पीर वाली जमीं दे दि |
            एसी कई घटनाओ जैसे :-अकबर नदी लाकर भी माता ज्वाला देवी मंदिर कि ज्वाला नहीं बुझा पाया  आदि घटनाओ से प्रभावित होकर अकबर ने एक नया धर्म "दीन ए इलाही" चलाया | उस धर्म में सनातन के नियम थे |सत्यता,ज्ञान,सर्वजीव प्रेम , न्याय आदि कि बातो पर जोर दिया था | उसकी मान्यता थी, कि सत्य, दया, सत्य , पूर्ण ज्ञान और इनकी हिफाजत धर्म है पर जिद्दी अज्ञानी कट्टर पंथियों ने उस धर्म को चलने नहीं दिया |

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