अगर जीवन के किसी भी मोड पर आपके मन में कैसा भी भेदभाव आता है
तो समझ लेना आप ईश्वर पर विश्वास नहीं अन्धविश्वास करते हो/
जब हमें अपने दोष दिखाई देने लगें तब ही यह मानना चाहिये
कि हम पर अब प्रभु की कृपा बरसी है,
स्वंय के दोष दिखाई देना ही प्रभु की कृपा का सुफ़ल है
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