जब भी चिड़ियों को बुलाकर प्यार से दाने दिए,
इस नई तहज़ीब ने इस पर कई ताने दिए।
जिन उजालों ने किया अंधी गुफ़ाओं से रिहा,
बेड़ियाँ पहनाके हमने उनको तकख़ाने दिए
हमने माँगी थी ज़रा-सी रोशनी घर के लिए,
आपने जलती हुई बस्ती के नज़राने दिए।
हादसे ऐसे भी गुज़रे उनके मेरे दरमियाँ,
लब रहे ख़ामोश और आँखों ने अफ़साने दिए।
ज़िंदगी खुशबू से अब तक इसलिए महरूम है,
हमने जिस्मों को चमन, रूहों को वीराने दिए।
आस्मानों को भी सजदों के लिए झुकना पड़ा,
वो भी क्या सदियाँ थीं, जिनने ऐसे दिवाने दिए।
ज़िंदगी चादर है, धुलके साफ़ हो जायेगी फिर,
इसलिए हमने भी इसमें दाग़ लग जाने दिए।
हाथ में तेज़ाब में फ़ाहे थे मरहम की जगह,
दोस्तों ने कब हमारे ज़ख्म मुरझाने दिए।
ज़िंदगी का ग़म नहीं, ग़म है हमें इस बात का,
उनने मुर्दे भी नहीं, क़ब्रों में दफ़नाने दिए।
मुहब्बत का ज़ज्बा जगा कर के देख
कभी दिलको तुम दिल बनाकर के देखो
हो तुम भी तभी तक कि जब तक कि हम हैं
न मनों तो हमको मिटाकर के देखो
कोई मुझपे इल्ज़ाम भरने से पहले
वफ़ायें मेरी आज़मा कर के देख
ख़ुलूसो, मुहब्बत है क्या चीज़ ज़ाहिद
कभी मयकदे में ये आकर दे देखो
तुम्हें हम तो अपना बनाये हुए है
हमें तुम भी अपना बनाकर के देखो
न मिट जाये ग़म तो है ये मेरा ज़िम्मा
मगर शर्त है जाम उठाकर के देखो
भुलाना हमें इतना आसाँ नहीं है
है आसाँ तो हमको भुलाकर दे देखो
सियासत में ‘नवाब’ बाज़ीगरी का
तमाशा क़रीब और जाकर के देखो
No comments:
Post a Comment
http://rktikariha.blogspot.com/