अन्ना के आन्दोलन पर उठाया जा रहा विज्ञो का सवाल मन में कई सवाल कड़ी कार रहा है
आप बताये क्या आना का आन्दोलन गैर लोकतान्त्रिक है
कही यथार्थ पर भावनाए हावी तो नही होने लगी है.
गहन शंशय है .
पता नहीं क्या सच है क्या गलत.
पर यह तो मै जरुर मानता हु
सिर्फ लीडर ही देश चलाने का ठेका नहीं ले रखे है
देश के एक एक आदमी को देश के बारे में सोचने का अधिकार है
देश के लिए क्या सही है ओंर क्या गलत, यह हर इन्सान सोच सकता है.
यदि चुने हुए नेता ही आपना काम सही तरीके से करते तो आज अन्ना के
साथ आमलोगो को सड़क पर उतरने की जरुरत क्यों पड़ती.
आप बताये क्या आना का आन्दोलन गैर लोकतान्त्रिक है
कही यथार्थ पर भावनाए हावी तो नही होने लगी है.
गहन शंशय है .
पता नहीं क्या सच है क्या गलत.
पर यह तो मै जरुर मानता हु
सिर्फ लीडर ही देश चलाने का ठेका नहीं ले रखे है
देश के एक एक आदमी को देश के बारे में सोचने का अधिकार है
देश के लिए क्या सही है ओंर क्या गलत, यह हर इन्सान सोच सकता है.
यदि चुने हुए नेता ही आपना काम सही तरीके से करते तो आज अन्ना के
साथ आमलोगो को सड़क पर उतरने की जरुरत क्यों पड़ती.
आखिर जनालोकपाल बिल पर्रित करने में सरकार को क्यों आपति है
क्या अन्ना अपने किसी निजी हित के लिए जनालोकपाल की मांग कर रहे है.
मैं कोई जन्मजात भ्रष्टाचारी नहीं हूँ
ReplyDeleteऔर न ही मेरा कोई, दूसरा सांथी भी भ्रष्टाचारी है
तो वो हमारा भ्रष्ट सिस्टम है
जो हमें, भ्रष्टाचार करने के लिए
समय समय पर, कदम-दर-कदम
उकसाता, डराता, भड़काता है !
गर, कुछ कर सकते हो, बदल सकते हो, तो बदल डालो
सड़े, गले, दीमक लगे, फफूंद लगे
भ्रष्ट, भ्रष्टतम, भ्रष्टाचारी सिस्टम को !
वरना
हो-हल्ला, चिल्लम-चिल्ली, का
कोई, कहीं कोई औचित्य ..