यह कैसा जनलोकपाल जिसमें कोई दलित,आदिवासी और पिछड़ों का प्रतिनिधित्व और आवाज नहीं....... हम पहले ही 3 संस्थाओं (कार्यपालिका- व्यवस्थापिका - न्यायपालिका ) के भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं.. उस जनलोकपाल के नाम पर चौथी संस्था खड़ी करने का क्या मतलब... यह भ्रष्ट नहीं होगी इसकी कोई गारंटी नहीं दे पा रहे हैं..... शिकायतकर्ता की जिम्मेदारी ऐर जवाबदेही का भी कोई जिक्र नहीं है........ फिर इसमें CBI ACB को मर्ज करने की बात क्यों जब आप इन् एजेंसियों को पहले ही भ्रष्ट मान रहे हैं तो इन्हें उसी लोकपाल में मर्झ दरने का मतलब उन्हीं भ्रष्ट लोगों को शामिल करना हुआ कि नही....... फिर अकेले अन्ना के गैंग की शर्तें क्यों..देश में और भी वैकल्पिक लोकपाल तैयार हैं .... सभी की सिफारिशों को शामिल किया जाना चाहिए...... अभी और समीक्षा बाकी है मेरे दोस्त.....वो आगे... इंकलाब जिंदाबाद....
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