सच बोलकर कौन मुसीबत मोल ले...यह कहते हुए अक्सर लोगों को सुना जाता है। लोग वास्तविक बातों को छुपाने के लिए तरह-तरह के झूठ तो बोलते ही हैं, साथ ही हकीकत को छुपाने के लिये ढ़ोंग और दिखावा भी करते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उनकी किसी गलती पर उन्होने सच बोला तो वे मुसीबत में फंस जाऐंगे। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता, कई बार सच बोलने के कई फायदे भी होते हैं। एक बार सच बोलने से आप कई बार के झूठ बोलने से बच जाते हैं। आइये चलते हैं एक दिलचश्प घटना की ओर जो सच के फायदे को बयान करती है....
एक डाकू अपने क्षेत्र में बड़ा प्रसिद्ध था। वह डाकू अमीरों का धन लूट कर गरीबों की मदद करता इसलिए वहां के गरीब लोग उसे बहुत मानते थे। भले ही वह डाका डालने का निंदनीय काम करता हो लेकिन लोग तो उसे अपना रहनुमा ही मानते थे। एक बार उस गांव में एक संत पधारे वे सभी को अच्छे अच्छे उपदेश देते। उनके उपदेशों को सुनने के लिए सभी तरह के लोग आते वह डाकू भी संत के प्रवचनों से काफी प्रभावित हुआ।
एक दिन वह साधु के पास गया और बोला कि महाराज मेरा भी कल्याण कैसे हो सकता है। साधु ने कहा अगर तुम सच का रास्ता अपनाओगे तो तो तुम्हारा कल्याण जरूर होगा। तब से वह डाकू हमेशा सच बोलने लगा। एक रात वह डाकू राजा के महल में चोरी करने पहुंचा। सोना, चांदी और बहुत सारे जेवर लेकर जब वो महल से भागने लगा तो राजा के सिपाहियों ने उसे पकड़ कर पूछा कि तुम कौन हो। डाकू ने सोचा कि अगर वह सच बोलेगा तो ये लो उसे पकड़ कर जेल में डाल देगें। और झूठ न बोलने की उसने कसम खाई थी। उसने सोचा मैं झूठ नहीं बोलूंगा जो होगा देखा जाऐगा। उसने सिपाहियों से कहा कि मैं डाकू हूं। सिपाही उसकी बात सुनकर हंसने लगे और बोले भाई जाओ अच्छा मजाक करते हो कोइ डाकू अपने मुंह से बोलता है कि वह डाकू है। डाकू खुशी खुशी वहां से चला गया। वह बड़ा खुश हुआ कि उसके सच बोलने का परिणाम बड़ा सुखद मिला।
एक डाकू अपने क्षेत्र में बड़ा प्रसिद्ध था। वह डाकू अमीरों का धन लूट कर गरीबों की मदद करता इसलिए वहां के गरीब लोग उसे बहुत मानते थे। भले ही वह डाका डालने का निंदनीय काम करता हो लेकिन लोग तो उसे अपना रहनुमा ही मानते थे। एक बार उस गांव में एक संत पधारे वे सभी को अच्छे अच्छे उपदेश देते। उनके उपदेशों को सुनने के लिए सभी तरह के लोग आते वह डाकू भी संत के प्रवचनों से काफी प्रभावित हुआ।
एक दिन वह साधु के पास गया और बोला कि महाराज मेरा भी कल्याण कैसे हो सकता है। साधु ने कहा अगर तुम सच का रास्ता अपनाओगे तो तो तुम्हारा कल्याण जरूर होगा। तब से वह डाकू हमेशा सच बोलने लगा। एक रात वह डाकू राजा के महल में चोरी करने पहुंचा। सोना, चांदी और बहुत सारे जेवर लेकर जब वो महल से भागने लगा तो राजा के सिपाहियों ने उसे पकड़ कर पूछा कि तुम कौन हो। डाकू ने सोचा कि अगर वह सच बोलेगा तो ये लो उसे पकड़ कर जेल में डाल देगें। और झूठ न बोलने की उसने कसम खाई थी। उसने सोचा मैं झूठ नहीं बोलूंगा जो होगा देखा जाऐगा। उसने सिपाहियों से कहा कि मैं डाकू हूं। सिपाही उसकी बात सुनकर हंसने लगे और बोले भाई जाओ अच्छा मजाक करते हो कोइ डाकू अपने मुंह से बोलता है कि वह डाकू है। डाकू खुशी खुशी वहां से चला गया। वह बड़ा खुश हुआ कि उसके सच बोलने का परिणाम बड़ा सुखद मिला।
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