एक ऐसे देश जिसे दुनिया का सबसे विशाल लोकतंत्र होने का गौरव हासिल है, वहां की राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए ए·त्र हुए एवं आधी रात में सोए हुए हजारों लोगों की भीड़ पर पुलिस अचानक हमला kर देती है। दूसरी ओर सरकार के नुमाइंदे अपनी क र्यवाही को पूरी तरह कानूनी बता·र जख्मों पर नमk छिड़क ने का काम करते है। गांधी के देश में जहाँ न तो पाक स्तान, मिश्र, युगांडा व चीन की तरह कोई परिस्थित है, तब आधी रात को रामदेव समर्थको पर हमले का क्या तुक है? क्या यह सरकारी गुंडागर्दी नहीं।
रामदेव की अगुवाई में हजारों लाखों लोग बेईमानी, भ्रष्ट्राचार व काले धन की वापसी के लिए प्रदर्शन क रना कोई गलत बात है, जो सरकर उन्हें रो·ना चाहती है। हमारे देश में सभी बातों का ठेका सिर्फ सर्आकार ने ले रखा है, क्या आम जनता की कोई हस्ती नहीं? वाजिब मांगों के लिए एकत्र हुए लोगों पर जब गोलिया, लाठी व अश्रुगैस छोड़े जाते हैं, वहां लोकतंत्र कहां रह जाता है।
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